Animal Care in February: पशु पाल रहे हैं तो 20 दिन तक ऐसे करें देखभाल, बढ़ जाएगा दूध उत्पादन

Animal Care in February: पशु पाल रहे हैं तो 20 दिन तक ऐसे करें देखभाल, बढ़ जाएगा दूध उत्पादन

Animal Care in February अगर आप कोई पशु बेचना चाहते हैं और वो बीमार है तो उसके सही दाम मिलने की उम्मीद कम ही होती है. बीमार होने पर दूध और मीट उत्पादन कम हो जाता है. लेकिन वक्त रहते कुछ ऐहतियाती कदम उठाकर इस तरह की परेशानी और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, साथ ही पशु भी हेल्दी रहेंगे. 

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Animal Care in February: पशु पाल रहे हैं तो 20 दिन तक ऐसे करें देखभाल, बढ़ जाएगा दूध उत्पादनकानपुर में गाय-बछड़ों को पहनाए गए कोट. (Photo: Screengrab)

पशु गाय-भैंस हो या फिर भेड़-बकरी, दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी खुराक बहुत जरूरी होती है. इस खुराक में हरे चारे से लेकर सूखा चारा, दाना और मिनरल्स शामिल रहते हैं. जरूरत के मुताबिक खुराक में सभी का तालमेल अच्छा रखा तो पशु सिर्फ दूध उत्पादन ही ज्यादा नहीं करेगा बल्कि मीट के लिए उसकी ग्रोथ भी तेजी से होगी. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं से बेहतर उत्पादन लेने के लिए खुराक के साथ-साथ बेहतर देखभाल की भी जरूरत होती है. अगर देखभाल में लापरवाही बरती तो खासकर फरवरी में पशु बीमारियों और संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाता है. 

जनवरी में कड़ाके की सर्दी के बाद फरवरी का मौसम बड़ा ही सामान्य सा होता है. ना तो सर्दी महसूस होती है और ना ही गर्मी का एहसास होता है. मौसम भी बड़ी जल्दीं-जल्दी बदलता है. दिन-रात के मौसम में बहुत ज्यादा फर्क दिखाई पड़ता है. ऐसे में पशुओं को खास देखभाल की जरूरत होती है. खासतौर पर गाभिन, छोटे बच्चे और बीमार पशुओं को ज्यादा देखभाल चाहिए होती है. बड़ी बात ये है कि इस दौरान बाजार में पशुओं की खरीद-फरोख्त भी खूब होती है. 

फरवरी की देखभाल में 10 बातों का रखें ख्याल 

किस महीने और किस मौसम में पशुओं की देखभाल कैसे करें, इसे लेकर समय-समय पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी की जाती है. जिससे घर पर ही कुछ जरूरी कदम उठाकर पशुओं को राहत दी जा सके. खासतौर पर पहले से बीमार और गर्भवती पशुओं का खास ख्याल रखने के बारे में जरूर बताया जाता है. 

पशु और उसे रखने वाले बाड़े की रोजाना सफाई करें. 
पशु को दिन में धूप तो रात को गर्म जगह पर रखें. 
जैसे ही पशु हीट में आए तो उसे उत्तम नस्ल के सांड या एआई से गाभिन कराएं. 
पशु तीन महीने का गाभिन हो तो पशु चिकित्सक से उसकी जांच कराएं. 
बच्चा देने वाले पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखें. 
डॉक्टर की सलाह पर गाय-भैंस, भेड़-बकरी के बच्चों को पेट के कीड़ों की दवाई जरूर दें.  
पशुओं को थनेला रोग से बचाने के लिए पूरा दूध निकालें. 
भेड़ और बकरियों को पीपीआर का टीका लगवाएं. 
बरसीम चारे की सिंचाई 12 से 14 या फिर 18 से 20 दिन में कर दें. 
बरसीम और जई फसल की कटाई सही अवस्था पर करते रहें.

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