Goat Growth: बीमारियां ही नहीं, पेट खराब होने पर भी नहीं होती है बकरों की ग्रोथ

Goat Growth: बीमारियां ही नहीं, पेट खराब होने पर भी नहीं होती है बकरों की ग्रोथ

Goat Growth शायद आपको सुनकर थोड़ा अजीब लगे, लेकिन पशु उत्पादन के घटने और बढ़ने में पीने का पानी एक अहम रोल निभाता है. जिस तरह से साफ-स्वच्छ और ताजा चारे की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह से भेड़-बकरियों के लिए ताजा और साफ-स्वच्छ पानी भी एक बड़ी जरूरत होती है. इतना ही नहीं पानी पिलाने के दौरान की साफ-सफाई भी बहुत अहमियत रखती है.

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Goat Growth: बीमारियां ही नहीं, पेट खराब होने पर भी नहीं होती है बकरों की ग्रोथप्रदेश में 8 नए बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं (फोटो क्रेडिट-किसान तक)

ऐसा नहीं है कि सिर्फ बीमार होने पर ही बकरे-बकरियों की ग्रोथ नहीं होती है. अगर बकरों का पेट खराब हो तो भी उनकी ग्रोथ नहीं होती है. अगर बकरी है तो उसका दूध उत्पादन नहीं बढ़ेगा. गोट एक्सपर्ट की मानें तो आज भी बकरे-बकरियों की डिमांड दूध से ज्यादा मीट पर है. यही वजह है कि अगर बकरे-बकरियों की हैल्थ ठीक नहीं होगी तो उनका वजन भी नहीं बढ़ेगा. जबकि हर एक भेड़-बकरी पालक की कोशि‍श होती है कि उसके बकरे-बकरियों का वजन तेजी से बढ़े. बकरा ज्यादा से ज्यादा वजन का हो जाए. लेकिन बकरे-बकरियों को होने वालीं पेट की बीमारियां ग्रोथ में रुकावट बन जाती हैं. 

और इसकी एक सबसे बड़ी और आम वजह है पीने का पानी. भेड़-बकरियों को पिलाया जा रहा पीने का पानी अगर साफ नहीं है तो पशु के बीमार पड़ने और उत्पादन घटने में देर नहीं लगेगी. अगर साफ-सफाई के साथ पानी नहीं पिलाया जा रहा है, पानी में मौजूद टीडीएस को कंट्रोल नहीं किया गया है तो फिर भेड़-बकरियों का पेट खराब होना तय है और इसके चलते उनकी ग्रोथ भी तेजी से नहीं होगी. 

ये हैं पीने के पानी पर टिप्स  

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पशुओं को पीने के पानी से जुड़ी टिप्स देते हुए कहा है कि हर संभव कोशि‍श की जाए कि पशुओं को ताजा पानी ही पीने के लिए दें. जैसे सुबह उस बर्तन या जगह से पानी को खाली कर दें जहां पशु पानी पीता है. पानी खाली करने के बाद उस बर्तन और जगह की अच्छी तरह से सफाई कर दें. अगर पानी की उस जगह पर अल्गी और गंदगी लगी है तो उसे अच्छी तरह से साफ कर दें. जब ये लगे कि सफाई अच्छी तरह से हो गई है तो उसमे ताजा पानी भर दें. अगर सर्दियों का मौसम है तो एकदम ठंडा यानि खुले में रखा रात का पानी बिल्कुल भी न पिलाएं. नलकूप का निकला ताजा पानी ही पशुओं को पिलाएं. 

ये लक्षण बताते हैं पानी की कमी

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

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