Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछड़े की कैसे करें देखभाल, क्या खि‍लाएं जानें सब कुछ 

Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछड़े की कैसे करें देखभाल, क्या खि‍लाएं जानें सब कुछ 

Calf Care in Winter सर्दियों के दौरान बछड़ों की देखभाल और खानपान का बहुत खास ख्याल रखना होता है. मौसम और तापमान के हिसाब से बछड़ों के चारे में बदलाव करना चाहिए. इतना ही नहीं पैदा होते ही बछ़ड़ों को पिलाया जाने वाला कोलोस्ट्रम भी अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए. साथ ही पिलाते वक्त मात्रा का भी ख्याल रखना चाहिए. 

Advertisement
Calf Care: सर्दियों में जन्म लेने वाले बछड़े की कैसे करें देखभाल, क्या खि‍लाएं जानें सब कुछ 

Calf Care in Winter सर्दियों के मौसम में पशुओं को दिए जाने वाले चारे में धीरे-धीरे बदलाव करना जरूरी होता है. क्योंकि पशुओं को नए तापमान के हिसाब से ढलना भी होता है. पशुओं के पेट और उसके दूसरे हिस्सों को नए चारे के हिसाब से ढलने में समय भी लगता है. मवेशी ठंड के तापमान से निपटने के लिए सर्दियों में मोटे बाल उगाते हैं जिससे शरीर की गर्मी का उत्पादन बढ़ता है. यह आमतौर पर दिल की धड़कन और सांस लेने की स्पीड बढ़ाकर किया जाता है. ऐसा करने से शरीर के अंगों में खून का बहाव बढ़ जाता है. ठंड के तनाव को झेलने के लिए आमतौर पर पशुओं को करीब 20 फीसद ज़्यादा चारे की ज़रूरत होती है. पतली गायों के मामले में ब्याने के बाद पहला एस्ट्रेस सामान्य स्वस्थ गाय की तुलना में 20 दिन बाद आता है. 

पहली सर्विस में गर्भधारण की दर भी पतली गायों में लगभग 20 फीसद कम होती है और ब्याने के दौरान ज़्यादा दिक्कतें होती हैं. जब ऐसे जानवर भविष्य में प्रजनन करते हैं, तो उन्हें प्रजनन के मौसम में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे कमजोर जानवरों से पैदा होने वाला कोलोस्ट्रम भी क्वालिटी और मात्रा में कम होता है. और इस तरह का कोलोस्ट्रम पिलाने से पैदा हुए बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है. 

सर्दियों में ऐसे करें बछडों की देखभाल 

  1. जन्म के तुरंत बाद नए जन्मे बच्चे को साफ करें. 
  2. जन्म लेते ही बछड़े को सांस लेना शुरू करवाएं. 
  3. बछड़े की नाल को स्टेरिलाइज़्ड कैंची या ब्लेड से काटें. 
  4. नाल के कट वाली जगह पर टिंचर आयोडीन-एंटीसेप्टिक लगाएं. 

ऐसे शुरू करें बछड़ों की खुराक 

  • बछड़े को जन्म के 1-2 घंटे के अंदर कोलोस्ट्रम पिलाएं. 
  • मां के पहले दूध कोलोस्ट्रम में भरपूर इम्यूनोग्लोबुलिन होता है.
  • कोलोस्ट्रम बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ाकर उसकी रक्षा करता है. 
  • कोलोस्ट्रम में मिनरल और विटामिन भी भरपूर होते हैं. 
  • कोलोस्ट्रम की वजह से पहला मल आसानी से निकल जाता है. 
  • जानवर को 10 दिन की उम्र में डीवॉर्मिंग देना चाहिए. 
  • 21 दिन बाद डीवॉर्मिंग की खुराक को फिर से दोहराएं. 
  • सामान्यता जन्म के समय बछड़े का वज़न 30 किलो  होता है. 
  • बछड़े को सुबह-शाम 1.5 किलो  कोलोस्ट्रम पिलाना चाहिए. 
  • अगर कोलोस्ट्रम कम पड़े तो अंडे-दूध से बना लेना चाहिए. 

कोलोस्ट्रम बनाने का ये है तरीका 

एक अंडे को 300 एमएल गर्म पानी में मिलाएं और 600 एमएल दूध और आधा चम्मच कैस्टर ऑयल मिलाएं. इस मिक्सचर में एक चम्मच फिश लिवर ऑयल और 80 मिलीग्राम ओरियोमाइसिन पाउडर मिलाएं. 15 दिन बाद बछड़े को सूखा चारा और कॉन्संट्रेट दिया जा सकता है.

ये भी पढ़ें- Egg Rate: बाजार में पहली बार 8 से 12 रुपये तक का बिक रहा अंडा, ये है बड़ी वजह

ये भी पढ़ें- Egg Testing: अंडा खरीद रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये काम, ऐसे जांचें अंडे की क्वालिटी

POST A COMMENT