Fish Care: किस तालाब में कितना होना चाहिए मछली बीज, कैसे करें तैयारी Fish Care: किस तालाब में कितना होना चाहिए मछली बीज, कैसे करें तैयारी
Fish Care मछलियों को हैल्थी और वजनदार बनाने में तालाब का पानी, खुराक, खाद, ऑक्सीजन और संक्रमित बीमारियों से बचाव आदि शामिल होता है. ऑक्सीजन का लेवल बनाए रखने के लिए एरेटर लगाए जाते हैं और पानी को प्रदूषण मुक्त रखना होता है. और इसी के लिए जुलाई-अगस्त में खास तैयारी करनी होती है.
तालाब में तैरती दिखीं हजारों मरी मछलियां.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)नासिर हुसैन - New Delhi,
- Jul 21, 2026,
- Updated Jul 21, 2026, 4:40 PM IST
बरसात के दौरान मछलियों के तालाब की देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है. खासतौर से इस मामले में कि तालाब में मछली पालन के लिए बीज कितने डाले जाएं. बीज की देखभाल कब और कैसे की जाए. गौरतलब रहे मॉनसून के दौरान मछलियां प्रजनन भी करती हैं, तो ऐसे में तालाब के पानी को प्रदूषण मुक्त रखना भी जरूरी हो जाता है. प्रजनन करने वाली मछलियों के लिए तालाब अलग से तैयार किए जाते हैं. लेकिन मॉनसून के दौरान तालाब के पानी में होने वाले बदलाव संक्रमित बीमारियों का खतरा बन जाते हैं.
इसी तरह के खतरे को देखते हुए खासतौर पर जुलाई-अगस्त में मछलियों के लिए खास तैयारियां करनी होती हैं. मॉनसून के मौसम में मछलियों की बिक्री कम हो जाती है. खासतौर से नदी और समुद्र से मछलियां नहीं पकड़ी जाती हैं. वो इसलिए कि मॉनसून के दौरान समुद्र और नदी में रहने वाली मछलियां प्रजनन करती हैं. जबकि तालाब में रहने वाली मछलियों के लिए तालाब में प्रजनन की अलग से व्यवस्था की जाती है.
बरसात में ऐसे करें मछली पालन
- तालाब में ब्रूडर (बीज बनाने) वाली मछलियों के खाने का पूरा ख्याल रखें.
- मछलियों के कुल शरीर के वजन का दो से तीन फीसद की दर से खाने को दें.
- बेहतर प्रजनक मछली तैयार करने के लिए प्रति किलोग्राम पूरक आहार में 10 ग्राम मिनरल मिक्चर और पांच ग्राम गट प्रोबायोटिक्स का इस्तेमाल करें.
- मछली बीज उत्पादक हैचरी में रोहु, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प और सिल्वर कार्प के स्पॉन (बीज) उत्पादन कर सकते हैं.
- नर्सरी तालाब में स्पॉन डालने के 15 दिनों के बाद ही रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल करें.
- नर्सरी तालाब की तैयारी के बाद उसमे 15-20 लाख स्पॉन प्रति एकड़ की दर से ही पालन करें.
- तालाब की तैयारी के बाद फ्राई स्पॉन की संख्या 1.5 से दो लाख प्रति एकड़ की दर से रखें.
- ग्रो आउट तालाब में मछली पालन के लिए 50 ग्राम के ईयररिंग की संख्या 3000 एकड़ और 100 ग्राम ईयरलिंग का स्टोरेज 2000 प्रति एकड़ की दर से करना चाहिए.
- सेमी डेंस मछली पालन के लिए तालाब में एयरेटर का इस्तेमाल करें.
- तालाब में चूने का इस्तेमाल 15 दिनों के अंतर पर पीएच मान के मुताबिक 10-15 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से करना चाहिए.
- तालाब में एक बार जैविक खाद के रूप में गोबर 400 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से करें.
- जैविक खाद के रूप में सरसों-राई की खल का इस्तेमाल 100 किलोग्राम प्रति एकड़ दर से करें.
- सिंगल सुपर फॉस्फेट 15-20 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल का छिड़काव करें.
- रासायनिक और जैविक उर्वरक के बीच का अन्तराल कम से कम 15 दिन होना चाहिए.
- पानी ज्यादा हरा होने पर चूना और रासायनिक उर्वरक का प्रयोग बन्द कर दें.
- मौसम खराब रहने पर तालाब में पूरक आहार का प्रयोग नहीं करें.
- तालाब में मछलियों को संक्रमण से बचाने के लिए हर महीने 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से पोटॉशियम परमेंगनेट के घोल का इस्तेमाल करें.
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