गर्मियों में पशुओं को लू से कैसे बचाएं?जीवन निर्वाह ही नहीं, बीमारियों से बचाने और अच्छे उत्पादन के लिए पानी बहुत जरूरी है. पशु यानि गाय-भैंस और भेड़-बकरियों को पानी न मिले तो संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि मौसम के हिसाब से पशुओं को दिनभर पानी पिलाने का वक्त तय कर लें. उसी के हिसाब से पशु के सामने पानी रखते रहें. क्योंकि पशुपालन हो या पोल्ट्री पालन, दोनों ही जगह पीने के पानी का बड़ा ही महत्व है. आपको सुनकर अटपटा लगेगा कि पशु उत्पादन का उत्पादन घटने और बढ़ने में पीने का पानी भी एक बड़ा कारण हैं. क्योंकि पशु है तो ये नहीं जहां चाह वहां उसे नहर, पोखर का पानी पिला दिया.
पशु-पक्षियों को भी हेल्दी रखने और उनसे उत्पादन लेने के लिए जरूरी है कि खाने के साथ-साथ पीने के पानी का भी ख्याल रखा जाए. पीने के पानी के बर्तन को साफ रखा जाए. ताजा पानी ही पशुओं को पिलाया जाए. पीने का पानी अगर साफ नहीं है तो पशु को बीमार पड़ने और उत्पादन घटने में देर नहीं लगेगी. वहीं अगर साफ-सफाई के साथ पानी पिलाया जा रहा है, पानी में मौजूद टीडीएस को कंट्रोल किया जा रहा है तो पशु-पक्षियों के बीमार पड़ने का खतरा कम हो जाता है.
पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पशुओं को पीने के पानी से जुड़ी टिप्स देते हुए कहा है कि हर संभव कोशिश की जाए कि पशुओं को ताजा पानी ही पीने के लिए दें. जैसे सुबह उस बर्तन या जगह से पानी को खाली कर दें जहां पशु पानी पीता है. पानी खाली करने के बाद उस बर्तन और जगह की अच्छी तरह से सफाई कर दें. अगर पानी की उस जगह पर अल्गी और गंदगी लगी है तो उसे अच्छी तरह से साफ कर दें. जब ये लगे कि सफाई अच्छी तरह से हो गई है तो उसमे ताजा पानी भर दें. अगर सर्दियों का मौसम है तो एकदम ठंडा यानि खुले में रखा रात का पानी बिल्कुल भी न पिलाएं. नलकूप का निकला ताजा पानी ही पशुओं को पिलाएं.
जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.
ये भी पढ़ें- PDFA Expo: इनाम में ट्रैक्टर-बुलैट जीतने से पहले गाय-भैंसों को कराना होगा डोप टेस्ट
Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today