बिजनौर में 6 गायों की संदिग्ध मौत. (Photo: Representational )पशुपालन को बढ़ावा देने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार लगातार कई काम कर रही है. पशुपालक को तकनीकी मदद देने के साथ ही सब्सिाडी भी दी जा रही है. बजट में योजनाओं के लिए करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं. हाल ही में राजस्थान के डेयरी प्रोडक्ट दूसरे राज्यों में बेचने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. इसी के चलते 18 फरवरी को पशुपालन विभाग की एक बैठक बुलाई गई थी. बैठक के दौरान कई योजनाओं के लक्ष्यों पर चर्चा की गई. खासतौर से फील्ड में दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ताओं को लेकर हिदायत दी गई.
वहीं पशुपालन से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का फायदा पशुपालक पहुंचाने की बात को दोहराया गया. वहीं बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जुड़ीं तीन खास योजनाओं मंगला पशु बीमा योजना, मोबाइल वेटरनरी यूनिट और सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना की प्रगति को बढ़ाने पर जोर दिया गया. साथ ही हर जिले में नियमित मॉनिटरिंग और फील्ड विजिट की मदद से सभी तीनों योजनाओं की वास्तविक स्थिति के आकलन की भी बात बैठक में की गई है.
राजस्थान सरकार मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) के संचालन को लेकर बहुत बहुत गंभीर है. मोबाइल वेटरनरी यूनिट के संचालन से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले पशुपालकों और पशुओं को बहुत फायदा हो रहा है. पशुपालन विभाग ने आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि बीते एक साल में 7 लाख 71 हजार 892 पशुपालकों ने 30 लाख 96 हजार से ज्यादा पशुओं का इलाज एमवीयू से कराया है.
वहीं एमवीयू के अलावा करीब 95 हजार पशुपालकों ने चैटबॉट की मदद से अपने पशुओं की बीमारी का इलाज कराया है. इस दौरान राज्य में एफएमडी टीकाकरण के मामले में अच्छे काम के लिए तारीफ भी हुई. सचिव का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कभी नहीं हुआ है. चार जिलों ने अब तक एफएमडी टीकाकरण का 100 लक्ष्य हासिल करने की जानकारी पोर्टल पर इंद्राज कर दिया है.
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति के बारे में बोलते हुए अधिकारियों ने बताया कि साल 2025-26 में अब तक 4 लाख 63 हजार पशुपालकों के 10 लाख 32 हजार पशुओं का पंजीकरण कराया जा चुका है, जिसमें से 2 लाख 76 हजार पशुपालकों के 5 लाख 53 हजार पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं. साथ ही 2 लाख 39 हजार पशुपालकों के 5 लाख 21 हजार पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी हो चुकी है.
शासन सचिव ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सख्ती और समन्वय के बीच तालमेल बिठाते हुए हमें 31 मार्च तक 21 लाख पशुओं के बीमा का लक्ष्य पूरा करना है. विभाग के निदेशक डॉ सुरेश मीना ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिलाधिकारियों से जिले में उपलब्ध सभी मानव संसाधनों का समुचित उपयोग करने का आग्रह करते हुए निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और लगन से प्रयास करने पर जोर दिया.
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