प्रतीकात्मक फोटो.एक बार फिर लंपी का कहर गायों पर टूट सकता है. देश के कई जिलों में लंपी का असर देखा जा रहा है. यूपी और हिमाचल प्रदेश में तो गायों की मौत भी हो चुकी है. एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश के 220 जिलों पर लंपी का खतरा मंडरा रहा है. जिसे देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. बिहार और तमिलनाडू के सबसे ज्यादा जिले लंपी के निशाने पर हैं. हालांकि यूपी में इसका असर कम ही बताया जा रहा है. अलर्ट रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र शासित समेत देश के करीब 29 राज्यों में लंपी का असर देखने को मिल सकता है.
लेकिन लंपी का आने वाला खतरा और भी बड़ा हो सकता है. क्योंकि इसी हफ्ते में तेज बारिश होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं एक्सपर्ट की मानें तो बारिश के दौरान लंपी का वायरस और ज्यादा अलर्ट हो जाता है. ये एक संक्रमण वाली बीमारी है. एक गाय को हो जाए तो दूसरी गायों में भी फैल जाती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो लंपी का वायरस मच्छर और मक्खी की मदद से फैलता है. इसलिए पशुओं के बाड़े में ज्यादा साफ-सफाई रखने की सलाह दी जाती है.
जारी हुए सरकारी अलर्ट में 29 राज्यों का जिक्र किया गया है. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि 29 राज्यों के करीब 220 जिलों में लंपी अपना कहर दिखा सकती है. सबसे ज्यादा 27 जिले बिहार के हैं. तमिलनाडू के 25 जिले हैं. राजस्थान, झारखंड और कर्नाटक के 18-18 जिले हैं. मणिपुर में 12, गोवा में 11 और मध्य प्रदेश में 10 जिले ऐसे हैं जहां लंपी बीमारी फैल सकती है. वहीं पश्चिम बंगाल में 9 यूपी के 7 और हिमाचल प्रदेश के 2 जिले भी इस लिस्ट में शामिल हैं.
बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (BASU), पटना के वाइस चांसलर डॉ. इन्द्रंजीत सिंह ने किसान तक को बताया कि सड़क पर घूमने वालीं और कुछ गौशालाओं में गायों को खाने के लिए पौष्टिक चारा नहीं मिल पाता है. जिसके चलते ऐसी गायों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. यही वजह है कि लंपी बीमारी का सबसे ज्यादा अटैक इसी तरह की गायों पर देखा गया है. लंपी की वजह से मौत भी ऐसी ही गायों की ज्यादा होती है.
ऐसा नहीं है कि जहां गायों को बहुत अच्छा चारा मिल रहा है वहां गायों की मौत लंपी की वजह से नहीं होगी. दूसरा यह कि सड़क पर घूमने वाली गाय बहुत जल्दी उन मक्खी-मच्छर की चपेट में आ गईं जो लंपी बीमारी के कारण होते हैं. जबकि गौशालाओं और डेयरी फार्म पर बहुत हद तक साफ-सफाई होने के चलते मच्छर-मक्खी का उतना अटैक नहीं हो पाता है.
डॉ. इन्द्रजीत सिंह का कहना है कि हम आज तक पशुपालन को अपने पुराने तौर-तरीके अपनाकर करते चले आ रहे हैं. जबकि क्लाइमेट चेंज के चलते अब बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है. सबसे पहले तो हमे करना यह होगा कि हम गाय-भैंस पालें या भेड़-बकरी समेत कोई भी दुधारू पशु, हमे उसे साइंटीफिक तरीके से पालना होगा. इसके लिए जरूरत है कि हम अपने पशुओं के फार्म पर बॉयो सिक्योसरिटी का पालन करें और आने वाले से भी कराएं.
जैसे अपने फार्म की बाड़बंदी करें. जिससे सड़क पर घूमने वाला कोई भी जानवर आपके फार्म में नहीं घुस सकें.अपने फार्म के अंदर और बाहर दवा का छिड़काव जरूर कराएं. दूसरा यह कि कुछ दवा फार्म पर रखें जिनका इस्तेमाल हाथ साफ करने के लिए हो. ऐसा करने के बाद ही पशु को हाथ लगाएं. पशु को हाथ लगाने के बाद एक बार फिर से दवाई का इस्तेमाल कर हाथ साफ करें, जिससे पशु की कोई बीमारी आपको न लगे.
इतना ही नहीं अगर कोई व्यक्ति बाहर से आपके फार्म में आ रहा है तो उसके शूज बाहर ही उतरवाएं या फिर उन्हेंर सेनेटाइज करें. हाथ और उनके कपड़ों को भी सेनेटाइज करवा सकें तो बहुत ही अच्छां है वर्ना तो पीपीई किट पहनाकर ही फार्म के अंदर ले जाएं.
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