
इंडिया-यूएस डील एक बार फिर चर्चाओं में है. अमेरिकी डेलीगेशन 22 जून को भारत पहुंच चुका है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल संग बातचीत भी शुरू हो गई है. सूत्रों की मानें तो इस बातचीत के संबंध में 24 जून को एक प्रेस कांफ्रेंस हो सकती है. लेकिन इसके साथ संयुक्त किसान मोर्चा भी सक्रिाय हो गया है. आज यानि 23 जून को सैंकड़ों किसान मोर्चा के बैनर तले जंतर-मंतर, दिल्ली पहुंच गए. इसमे सरदार जगजीत डल्लेवाल, अभिमन्यू कुहाड़ और मनोज जागलान भी शामिल थे. इस धरने के बाद 25 जून को किसान एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहे हैं. जहां आगे की रणनीति बनाई जाएगी.
किसानों ने जंतर-मंतर से हुंकार भरते हुए कहा है कि अगर ये डील रद्द नहीं की गई तो हमें एक बार फिर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. उनका आरोप है कि इस डील के होने के बाद कुछ अनाज के साथ-साथ डेयरी और पोल्ट्री प्रोडक्ट का रास्ता भी खुल जाएगा. हालांकि किसानों का ये सांकेतिक धरना था, लेकिन फिर भी पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसान इसमे शामिल होने पहुंचे थे. इस मौके पर किसानी झंडों के साथ "अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर भारत से वापस जाओ" और "भारत में अमेरिका की दादागिरी नहीं चलेगी" जैसे नारे भी लगाए गए.
किसान नेता जगजीत डल्लेवाल की मांग है कि सरकार इस डील को रद्द करे वर्ना किसान फिर से सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होगा. हालांकि हमने इस मामले में 25 जून को एक बैठक बुलाई है. किसान नेता मनोज जागलान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया-यूएस डील में डेयरी और पोल्ट्री भी शामिल है. जैसे पोल्ट्री में चिकन अमेरिका से आने लगेगा.
अमेरिका में चिकन लेग पीस नहीं खाया जाता है. अमेरिका से लेग पीस लाकर इंडिया में डंप किए जाएंगे. इसी तरह से अमेरिका में गाय ज्यादा दूध देती हैं. ज्यादा दूध के लिए उन्हें मीट और ब्लड मील खिलाया जाता है. इस तरह धार्मिक लिहाज से भी वहां के डेयरी प्रोडक्ट हमारे लिए सही नहीं हैं.
अभिमन्यू कुहाड़ ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि इस डील में कई ऐसे अनाज शामिल हैं जो अमेरिका से आएंगे. अगर सब कुछ अमेरिका से मंगाया जाएगा तो हमारा किसान क्या करेगा. ऐसी सूचना है कि अमेरिका से सोयाबीन-मक्का आ सकती है. वहां क्योंकि किसानों के पास टेक्नोलॉजी है, हाईटेक मशीनें हैं और तो और किसानों को लाखों रुपये की सालाना सब्सििडी भी सरकार की ओर से मिलती है. अब ऐसे में उनका प्रोडक्ट सस्ता होता है. और हमारा किसान अपने बल पर फसल उगाते हैं जिसके चलते लागत ज्यादा आती हैं. इसलिए रेट में उनसे मुकाबला नहीं हो पाता है.
अभिमन्यू कुहाड़ का कहना है कि अगर सरकार मांग नहीं मानती है तो 15 अगस्त को दातासिंहवाला-खनौरी मोर्चे पर उस स्थान से किसानों द्वारा पैदल यात्रा शुरू करी जाएगी जहां शुभकरण सिंह की शहादत हुई थी और यात्रा का समापन 25 अगस्त को जंतर-मंतर पर हजारों-लाखों किसानों की रैली कर के किया जाएगा. इस पैदल यात्रा की रूपरेखा तैयार करने के लिए 20 जुलाई को मध्यप्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन किया जाएगा.
ये भी पढ़ें:
Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन
EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today