मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष का हल्लाबोलमहाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी को लेकर सियासत तेज हो गई है. मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले सोमवार को विपक्षी दलों ने विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर प्रदर्शन कर राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाई. विपक्ष ने मांग की कि किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए और कर्जमाफी योजना में लगाई गई शर्तों को हटाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल सके. प्रदर्शन का नेतृत्व शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे, अंबादास दानवे और कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने किया. इस दौरान विपक्षी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कहा कि किसानों को बिना किसी प्रक्रिया के पूर्ण कर्जमाफी होनी चाहिए.
विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य सरकार ने भले ही कर्जमाफी की घोषणा कर दी है, लेकिन योजना में रखी गई कई शर्तों के कारण बड़ी संख्या में किसान इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे. उन्होंने सरकार से मांग की है कि कर्जमाफी को आसान बनाया जाए और सभी पात्र किसानों को इसका फायदा मिले. इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने भी कर्जमाफी योजना में रखी गई सख्त शर्तों को हटाने की मांग की थी. उन्होंने किसानों के लिए बिना शर्त कर्जमाफी लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था.
इस विरोध प्रदर्शन में विपक्षी विधायकों ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और तत्काल राहत कदम उठाने की मांग की. विधायकों ने कर्जमाफी के अलावा किसानों की समस्याओं, जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी परेशानियों, फसल नुकसान और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की वास्तविक परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसानों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और खेती-किसानी से जुड़े समुदाय को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए.
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की कृषि कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी है. इस योजना से करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है. इस योजना का नाम ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्ज-मुक्ति योजना’ रखा गया है. इस योजना के तहत किसानों का 2 लाख रुपये तक का कृषि कर्ज माफ किया जाएगा. योजना में तीन हिस्से शामिल हैं- कर्जमाफी, एकमुश्त निपटान (OTS) और प्रोत्साहन लाभ. सरकार के अनुसार, योजना का लाभ लेने के लिए जमीन के मालिकाना हक की कोई अनिवार्य शर्त नहीं रखी गई है.
योजना के तहत जिन किसानों का अल्पकालीन फसल लोन (मूलधन और ब्याज सहित) 2 लाख रुपये तक है, उनका पूरा कर्ज माफ किया जाएगा. इसके लिए जरूरी है कि यह कर्ज 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिया गया हो और 30 सितंबर 2025 तक बकाया हो. साथ ही यह राशि 31 मार्च 2026 तक चुकाई नहीं गई हो. वहीं, जिन किसानों पर 2 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है, उन्हें एकमुश्त निपटान योजना (OTS) के तहत शामिल किया जाएगा. ऐसे किसानों को 2 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान करना होगा, जिसके बाद उन्हें 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी का लाभ मिलेगा.
इसके लिए किसानों को अपने हिस्से की राशि जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है. बता दें कि, महाराष्ट्र में किसान कर्जमाफी को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. जहां सरकार इसे किसानों के लिए बड़ी राहत बता रही है, वहीं विपक्ष योजना को आसान और बिना शर्त लागू करने की मांग कर रहा है. (PTI)
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