Fisheries: मछली विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर की देशभर में हो रही चर्चा

Fisheries: मछली विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर की देशभर में हो रही चर्चा

Fisheries साल 2025-26 में पश्चि‍म बंगाल में 25 लाख टन से ज्यादा मछली उत्पादन हुआ था. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो बंगाल में मछली उत्पादन बढ़ाने की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं. लेकिन जरूरत इस बात की है कि मछली पालकों के लिए संसाधन बढ़ाए जाएं. इसी को देखते हुए केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बीच एक बड़ी बैठक होने जा रही है. इसमे फिशरीज रिसर्च से जुड़े तमाम केन्द्र संस्थान भी हिस्सा ले रहे हैं. 

Advertisement
Fisheries: मछली विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर की देशभर में हो रही चर्चायूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत में मछली भोज रखा गया था . (Photo: Unsplash)

मछली खाने पर कथा वाचक धीरेन्द्र शास्त्री ने एक बयान दिया था. बयान के बाद मछली को लेकर सियासत शुरू हो गई थी. हालांकि ये एक अलग मामला था, लेकिन इसी बीच पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर की देशभर में चर्चा हो रही है. ये चर्चा भी मछली को लेकर ही है. पूर्वी मेदिनीपुर देशभर में एक आदर्श फिशरीज के रूप में जाना जाता है. लेकिन पूर्वी मेदिनीपुर को ये खि‍ताब ऐसे ही नहीं मिला है. इस जिले में 12 टन प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादन किया जा रहा है. ये अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है. इतना ही नहीं पूर्वी मेदिनीपुर जिला सूखी मछली का क्लस्टर हब भी है. यही सब वो वजह हैं जो पश्चिैम बंगाल को मछली उत्पादन के मामले में देशभर में दूसरे नंबर का बनाती हैं. 
साथ ही बंगाल को फिश सीड (बीज) का बड़ा बाजार भी माना जाता है. इसी के चलते ब्ल्यू इकॉनोमी को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार की निगाहें पश्चिम बंगाल पर लगी हुई हैं. केन्द्रीय मत्स्य और पशुपालन मंत्री आज पश्चि म बंगाल जा रहे हैं. जहां वो सीएम शुभेन्दू अधि‍कारी से मुलाकात कर मछली उत्पादन को और बढ़ाने पर बात करेंगे. गौरतलब रहे पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत केन्द्र सरकार यहां 617 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है.

प. बंगाल में ऐसे बढ़ा मछली उत्पादन  

पश्चिम बंगाल में साल 2025-26 में राज्य में 25.43 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ था. इसी दौरान केन्द्र सरकार ने योजना के तहत बड़ा निवेश किया था. जिसके चलते हॉर्वेस्ट और पोस्ट हॉर्वेस्ट के लिए बुनियादी ढांचा, प्रोसेसिंग को हाईटेक बनाया गया. जिसका 30 लाख से ज्यादा मछली पालकों ने फायदा उठाया. वैल्यू एडिशन और बाजार के चलते एक नया और बड़ा प्लेटफार्म तैयार हुआ. केन्द्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर में सूखी मछली क्लस्टर समेत मछली उत्पादन और प्रोसेसिंग के 34 क्लस्टर घोषि‍त किए. मछली उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाजार की परेशानियों को खत्म करने के लिए मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) बनाए जा रहे हैं. डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है. 

बैठक में इस पर होगी चर्चा 

पीआईबी की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक होने वाली बैठक में केंद्र, राज्य सरकार और फिशरीज से जुड़े आईसीएआर के सभी संस्थान इस बैठक में शामिल रहेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे जलीय कृषि क्षेत्र के विकास को स्पीड देने में मदद मिलेगी. इस बैठक में मछुआरों की जिंदगी में सुधार लाने, मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, बाजार संपर्कों को मजबूत करने और राज्य के मछली उत्पादन के विजन को आगे बढ़ाने में योगदान मिलने की पूरी उम्मीद है. 

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

POST A COMMENT