आइडा के प्रेसिडेंट विजेन्द्र सिंह और डायरेक्टर भारती बालाजी.ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (AIDA) ने एक बड़ी घोषणा की है. उनका कहना है कि देश में अभी इथेनॉल का जितना उत्पादन हो रहा है अब हम उसका डबल उत्पादन करने को तैयार है. साथ ही पेट्रोल के बाद अब सरप्लस उत्पादन का इस्तेमाल डीजल में आईसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) की ब्लेंडिंग की तैयारी हो रही है. AIDA का कहना है कि इसका बड़ा फायदा किसानों को पहुंचेगा. गांवों की इकोनॉमी मजबूत होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी साफ किया कि अभी इस बारे में सरकार और संबंधित मंत्रालय के साथ AIDA की कोई बातचीत नहीं हुई है.
लेकिन जल्द ही AIDA अपने प्रस्ताव के साथ सरकार और मंत्रालय के अधिकारियों से मिलेगा. वहीं 24 मार्च 2026 में AIDA के दिल्ली में होने वाले कान्क्लेव में इससे जुड़ी बड़ी घोषणा की जा सकती है. गौरतलब रहे देश में ई20 योजना चल रही है. इसके तहत पेट्रोल में इथेनॉल की 20 फीसद ब्लेंडिंग की जा रही है. देश में अनाज और गन्ने से इथेनॉल बनाया जा रहा है. अब तो मक्का भी इथेनॉल बनाने में शामिल हो गया है.
AIDA के प्रेसिडेंट विजेन्द्र सिंह ने किसान तक को बताया कि ऐसा नहीं है कि भारत में ही पहली बार पेट्रोल-डीजल में ब्लेंडिंग हो रही है. इससे पहले विश्व के दूसरे देशों में काफी वक्त से इथेनॉल की ब्लेंडिंग हो रही है. इससे गाडि़यों पर कोई नुकसान नहीं होगा अगर वो ज्यादा पुरानी नहीं हैं तो.
अगर डीजल में ब्लेंडिंग की बात करें तो आइसोब्यूटेनॉल की ब्लेंडिंग होगी. अभी कर्नाटक स्टेट रोडवेज अपने यहां 100 बसों को उस डीजल से चला रहा है जिसमे आइसोब्यूटेनॉल की ब्लेंडिंग की गई है. इतना ही नहीं जितना ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन होगा उतना ही किसानों को फायदा होगा. एक हजार करोड़ लीटर उत्पादन करने पर किसानों के हिस्से में 72 हजार करोड़ रुपये आते हैं.
विजेन्द्र सिंह ने बातचीत में बताया कि अभी तक हम पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए एक हजार करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर रहे थे. लेकिन मशीनरी से लेकर कच्चे माल तक की अब हमारे पास इतनी उपलब्धता है कि हम दो हजार करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन की क्षमता पर पहुंच गए हैं. इसलिए जो सरप्लस क्षमता हमारी है उसमे हम डीजल के लिए आइसोब्यूटेनॉल बना सकते हैं. इसमे हमे किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आएगी. हमारे पास सभी संसाधन मौजूद हैं.
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