आइडा के प्रेसिडेंट विजेन्द्र सिंह और डायरेक्टर भारती.पोल्ट्री-डेयरी हो या फिशरीज सेक्टर, सभी में फीड पर सबसे ज्यादा लागत आती है. लेकिन इस लागत को डीडीजीएस (Distillers Dried Grains with Solubles) से कम किया जा सकता है. इथेनॉल बनने के बाद मक्का-चावल के अलावा जो दूसरे अनाज का वेस्ट निकलता है उसे डीडीजीएस कहा जाता है. लेकिन पोल्ट्री की बात करें तो अभी मक्का का डीडीजीएस इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं है. क्योंकि ये पोल्ट्री के मानकों पर नहीं है. इसी परेशानी को दूर करते हुए ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (AIDA) पोल्ट्री ही नहीं डेयरी-फिशरीज के लिए भी मानकों पर आधारित डीडीजीएस तैयार करने की बात कही है.
किसान तक से हुई बातचीत में उन्होंने कहा है कि लाइव स्टॉक सेक्टर हमे अपनी जरूरत बताए तो हम उसी के मुताबिक डीडीजीएस तैयार कर सकते हैं. साथ ही जब सप्लाई हो तो वो अपने मानकों के मुताबिक उसे चेक करा सकते हैं. इसके लिए हम लाइव स्टॉक के तीनों ही सेक्टर डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज से जुड़ी एसोसिएशन के साथ बैठकर बात करने को तैयार हैं.
AIDA के प्रेसिडेंट विजेन्द्र सिंह ने किसान तक को बताया कि अभी तक डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज सेक्टर में से किसी ने भी हमसे कोई मुलाकात नहीं की है. या तक की फीड सेक्टर से भी कोई नहीं मिला है. अगर वो चाहते हैं कि उनके मानकों पर आधारित डीडीजीएस तैयार हो तो हम उसके लिए तैयार हैं. वो हमें अपनी जरूरत बता दें. हम उन मानकों पर डीडीजीएस की सप्लाई देने को तैयार हैं.
AIDA की डायरेक्टर भारती बालाजी ने किसान तक से बातचीत में बताया कि हम लाइव स्टॉक सेक्टर की इस पहल का स्वागत करते हैं. वो डीडीजीएस को अपने फीड में शामिल करना चाह रहे हैं. साथ ही जरूरत पड़ने पर डीडीजीएस के लिए अच्छा दाम देने को भी तैयार हैं. ये दोनों ही लोगों के लिए खुशी की बात है. हम इस पहल को आगे बढ़ाएंगे. कहीं न कहीं इससे हमारे पोल्ट्री फार्मर भी मजबूत होंगे. साथ ही इथेनॉल के वेस्ट की भी डिमांड आने लगेगी.
कंपाउंड फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के प्रेसिडेंट दिव्य कुमार गुलाटी ने किसान तक को बताया कि हम अगर डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज में 10 फीसद भी डीडीजीएस इस्तेमाल करते हैं तो हमे हर साल करीब 20 लाख टन डीडीजीएस की जरूरत होगी. इसमे मक्का से बना डीडीजीएस भी होगा तो चावल से बना हुआ डीडीजीएस भी. हालांकि अभी थोड़ा बहुत डीडीजीएस डेयरी में इस्तेमाल हो रहा है.
बीते कुछ वक्त पहले यूपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन और पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच एक बैठक हुई थी. बैठक के दौरान पीएफआई ने पोल्ट्री में डीडीजीएस इस्तेमाल करने पर अपनी सहमति दी थी. लेकिन इसके साथ ही उनकी कुछ डिमांड भी थी. पीएफआई की ओर से बैठक में प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा शामिल हुए थे. उनका कहना था कि मक्का पोल्ट्री फीड का अहम हिस्सा है.
अगर डीडीजीएस को पोल्ट्री फीड में शामिल किया जाता है तो उसके लिए कुछ मानक है. उन मानक को पूरा करने पर ही इसका इस्तेमाल करने से फायदा होगा. जैसे एफ्लाटॉक्सिन का लेवल 20 पीपीबी से कम होना चाहिए. वहीं नमी का लेवल भी 12 फीसद से कम ही होना चाहिए. अगर ये मानक पूरे किए जाते हैं तो फिर डीडीजीएस को इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है.
ये भी पढ़ें- PDFA Expo: इनाम में ट्रैक्टर-बुलैट जीतने से पहले गाय-भैंसों को कराना होगा डोप टेस्ट
Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today