
उत्तर प्रदेश में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला जारी है. इसी बीच लखनऊ के आमौसी स्थित मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 7-9 अप्रैल के दौरान प्रदेश में बेमौसम तूफानी वर्षा की संभावना है. जिससे आम लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में मौसम का यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण हो रहा है. इसका असर सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखाई देगा और धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल जाएगा.
उन्होंने बताया कि 6 अप्रैल को प्रदेश में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी. वहीं लखनऊ, कानपुर और झांसी मंडल में बादलों की आवाजाही के साथ बीच-बीच में तेज बौछारें पड़ने की संभावना है. मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, लखनऊ, बाराबंकी, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, महोबा, झांसी, हमीरपुर, हरदोई और कानपुर समेत कई जिलों में सोमवार से बुधवार तक तेज बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है.
वहीं सोमवार को अयोध्या, आजमगढ़, गोंडा, गोरखपुर, बस्ती, जौनपुर, वाराणसी, मऊ, मेरठ, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बदायूं, देवरिया, मिर्जापुर, सीतापुर और शाहजहांपुर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इस दौरान 3-5°C की प्रभावी गिरावट आने तथा उसके बाद 10 अप्रैल से प्रदेश का मौसम शुष्क हो जाने की संभावना है.
दरअसल, प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है. खेतों में कटी हुई फसलें भीग जाने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.
उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कई जनपदों में फिर हुई असमय बारिश से किसानों को होने वाली परेशानी के बारे में जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर हाल में यह प्रयास करें कि आपदा का असर किसानों पर न्यूनतम हो. जनहानि, पशुहानि, घायलों व चोटिलों को 24 घंटे में दिया जाए मुआवजा दिलाना सुनिश्चित करें. इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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