
उत्तर भारत के किसानों के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 29 और 30 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर पूरे उत्तर भारत में देखने को मिल सकता है. यह सिस्टम पश्चिमी विक्षोभ (Westerly Jet Streams) के कारण बन रहा है, जिसने हाल ही में मध्य-पूर्व के देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात पैदा किए थे.
अब यही सिस्टम उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है. इसके प्रभाव से कई राज्यों में धूल भरी आंधी, तूफान और गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना है. वेदर एक्सपर्ट के अनुसार, 29-30 मार्च के बाद 3-4 अप्रैल और फिर 6 से 9 अप्रैल के बीच भी ऐसे ही मौसम के दौर देखने को मिल सकते हैं. यानी अगले 15 दिनों तक मौसम असामान्य बना रह सकता है.
मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर किसानों, खासकर गेहूं की खेती करने वालों पर पड़ सकता है. इस समय अधिकांश जगहों पर गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है या कटाई के करीब है. ऐसे में अगर इस दौरान बारिश या आंधी आती है, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है. तेज हवा और बारिश से खड़ी फसल गिर सकती है, जिससे दाने खराब हो जाएंगे और पैदावार घट सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि 29-30 मार्च का मौसम कुछ इलाकों में थोड़ी राहत दे सकता है, लेकिन इसके बाद 3 अप्रैल से जो मौसम बदलेगा, वह ज्यादा असरदार हो सकता है. ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि अगर उनकी फसल तैयार है, तो उसे जल्द से जल्द काटकर सुरक्षित जगह पर रख लें. इससे संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
इसके अलावा, जिन किसानों ने अभी तक कटाई शुरू नहीं की है, उन्हें मौसम की जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है. खेत में खड़ी फसल को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाना बेहद आवश्यक है. कटाई के बाद फसल को खुले में न छोड़ें, बल्कि उसे ढककर या गोदाम में सुरक्षित रखें. बहरहाल, आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. इसलिए समय रहते सावधानी बरतना ही नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका है.