El Nino का खतरा मंडराया, खरीफ फसलों की पैदावार में 10% गिरावट का अंदेशा

El Nino का खतरा मंडराया, खरीफ फसलों की पैदावार में 10% गिरावट का अंदेशा

अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर आईसीएआर की एक स्टडी में बड़ा खुलासा हुआ है. इसके मुताबिक अल नीनो के दौरान खरीफ फसलों की पैदावार में 10% तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

el nino alertel nino alert
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 20, 2026,
  • Updated May 20, 2026, 3:23 PM IST

देश में एक बार फिर अल नीनो के खतरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खेती से जुड़ी एक अहम स्टडी में खुलासा हुआ है कि जब-जब अल नीनो सक्रिय हुआ है, तब-तब खरीफ फसलों की पैदावार में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली है. यह अध्ययन आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम रिसर्च के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जिसमें देश के कई प्रमुख कृषि राज्यों को शामिल किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो का सीधा असर मॉनसून पर पड़ता है, जिससे खेती की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है.

वैज्ञानिक बताते हैं कि अल नीनो का सीधा संबंध मॉनसून से है. जब अल नीनो एक्टिव होता है तो मॉनसून की बारिश घट जाती है, सिंचाई का संकट पैदा होता है, मिट्टी की नमी खत्म होती है और उत्पादन निचले स्तर पर चला जाता है. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम रिसर्च की स्टडी के हवाले से यह रिपोर्ट तैयार की है.

धान, मक्का सबसे अधिक प्रभावित

स्टडी में लगे वैज्ञानिकों ने बताया है कि अलग-अलग राज्यों में अल नीनो से प्रभावित वर्षों में खरीफ फसलों की उपज 10 फीसद तक गिर गई जिनमें धान और मक्का प्रमुख हैं. इस स्टडी को सुभाष एन पिल्लई की अगुवाई में तैयार किया गया है जिसमें आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, यूपी, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं.

रिपोर्ट बताती है कि अल नीनो के असर से इन राज्यों में खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान का उत्पादन प्रभावित हुआ और उसकी पैदावार गिर गई. मक्के के साथ भी ऐसी ही स्थिति रही. धान, मक्का के अलावा बाजरा और रागी जैसी फसलों की पैदावार भी 10 फीसद से अधिक प्रभावित हुई. इस तरह का असर देश के 36 जिलों में देखा गया, जब अल नीनो अपने एक्टिव मोड में था. हालांकि धान और मक्का में गिरावट 77 में से 65 जिलों में प्रमुखता से देखा गया.

अल नीनो और उसका असर

अल नीनो जलवायु का ऐसा पैटर्न है जिसमें महासागर का पानी अधिक गर्म हो जाता है जिससे गर्म हवाएं जमीन की ओर चलती हैं और बारिश को प्रभावित करती हैं. ये गर्म हवाएं भारत में मॉनसून के पूरे चक्र को प्रभावित करती हैं और उसे कमजोर बनाती हैं. आईसीएआर की रिपोर्ट अल नीनो के तीन साल-2002, 2004 और 2009 पर आधारित है जिससे खरीफ फसलों पर बड़े असर का पता चलता है.

इस रिपोर्ट से किसानों और वैज्ञानिकों को समझने में आसानी होगी कि अल नीनो कैसे फसलों को प्रभावित करता है और इसके असर को कम करने के लिए पहले से क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए. आईसीएआर की स्टडी में उन जिलों पर भी फोकस किया गया है जहां अल नीनो का अधिक प्रभाव देखा गया. इन जिलों में खरीफ फसलों के उत्पादन में 10 फीसद से भी अधिक गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट बताती है कि अल नीनो के संभावित खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों को जलवायु स्मार्ट फसलें विकसित करनी चाहिए ताकि बढ़ते तापमान के असर को कुछ कम करते हुए अच्छा उत्पादन लिया जा सके.

अल नीनो से मॉनसून की चाल धीमी

भारत का दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून, जो जून से सितंबर के बीच देश की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा लाता है, यहां की खेती और पानी की सप्लाई की रीढ़ है. और इतिहास गवाह है कि 'अल नीनो' हमेशा से इसका दुश्मन रहा है. ऐसा नहीं है कि हर साल 'अल नीनो' या 'ला नीना' की घटना होती ही हो, या फिर इसका असर दुनिया भर में हर जगह एक जैसा ही हो. 

असल में, अलग-अलग इलाकों में इसके असर में काफी फर्क हो सकता है. लेकिन 'अल नीनो' के एक्टिव होने से आम तौर पर बेतहाशा गर्मी पड़ती है. 2024, जो अब तक का सबसे गर्म साल रहा है, उसकी वजह भी यही थी. IMD ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि इस साल भी 'अल नीनो' जैसे हालात बनने की पूरी संभावना है.

MORE NEWS

Read more!