कश्मीर के मौसम में बड़ा बदलाव (फाइल फोटो)कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम ने अचानक करवट ले ली है. ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी और घाटी के मैदानी हिस्सों में बारिश ने जनजीवन पर असर डाला है. मौसम विभाग ने सोमवार रात तक बारिश, बर्फबारी और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है. इसी के चलते किसानों को फिलहाल खेतों में सभी काम रोकने की सलाह दी गई है. वहीं, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग-जोजिला, गुरेज, यूसमर्ग और रजदान टॉप जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी दर्ज की गई है. इस बर्फबारी का सीधा असर यातायात पर पड़ा है. श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे और बांदीपोरा-गुरेज सड़क को एहतियातन बंद करना पड़ा, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई है.
मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मौसम को ठंडा और नम बना दिया है. हालांकि, बादलों की वजह से न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. श्रीनगर में रात का तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच गया, जबकि पूरे कश्मीर में न्यूनतम तापमान औसत से 3 से 5 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड हुआ.
मौसम विभाग के अनुसार, 31 मार्च को भी बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है. 1 से 2 अप्रैल के बीच अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश के आसार हैं. वहीं, 3 से 7 अप्रैल के बीच भी बीच-बीच में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की गतिविधियां जारी रह सकती हैं.
मौजूदा मौसम को देखते हुए कश्मीर में किसानों को सोमवार तक सभी कृषि कार्य रोकने की सलाह दी गई है. लगातार नमी और खराब मौसम फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे हाईवे की स्थिति और मौसम अपडेट लेकर ही सफर करें.
इसके अलावा मौसम विभाग के एग्रोमेट ने विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें एग्रामेट ने कहा है कि ओलावृष्टि, तेज हवाओं और बारिश को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. पकी फसलों की तुरंत कटाई कर सुरक्षित स्थान पर रखें और खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें. वहीं, बागवानी फसलों और सब्जियों को सहारा देकर गिरने से बचाएं. तेज हवाओं में फसल को ढककर रखें. पशुओं को खराब मौसम के दौरान खुले में न छोड़ें और चारे को सुरक्षित रखें.
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