
उत्तराखंड में इन दिनों ठंड बहुत ज्यादा बढ़ गई है. ठंडी हवा, शीतलहर और घने कोहरे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. तीर्थ नगरी हरिद्वार में सुबह से ही इतना घना कोहरा छाया रहा कि थोड़ी दूर का भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा. सड़कों, घाटों और इमारतों पर कोहरे की मोटी चादर नजर आ रही है. हर की पौड़ी, जो साल भर श्रद्धालुओं से भरी रहती है, आज लगभग खाली दिखी. ऐसा लग रहा था जैसे हर की पौड़ी को कोहरे ने पूरी तरह ढक लिया हो.
हरिद्वार के गंगा घाटों पर आम दिनों की तरह चहल-पहल नहीं दिखी. बहुत कम श्रद्धालु स्नान करते नजर आए. ठंड से बचने के लिए लोग घाटों पर आग जलाकर अपने हाथ और शरीर सेंकते दिखे. कोहरे के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है, जिससे लोगों को आने-जाने में भी परेशानी हो रही है.
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड ने लोगों को परेशान कर दिया है. उधम सिंह नगर और हरिद्वार में कोहरे का असर साफ दिख रहा है. वहीं बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी जिलों में पानी के स्रोत जमने लगे हैं. लोग अब मौसम की पहली बर्फबारी और बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि ठंड का असर थोड़ा कम हो सके.
पहाड़ी इलाकों में ठंड का असर मैदानी इलाकों तक पहुंच गया है. राजस्थान का फतेहपुर शेखावाटी पिछले दो दिनों से मैदानी इलाकों में सबसे ठंडा रहा. यहां तापमान माइनस में चला गया है. खेतों में सरसों की फसल पर बर्फ की परत जम गई है. यह नजारा किसी पहाड़ी इलाके या कश्मीर की वादियों जैसा लग रहा है. किसानों ने बताया कि जब उन्होंने सिंचाई के लिए पाइप लाइन चालू की, तो पानी की जगह बर्फ निकलने लगी.
फतेहपुर में ठंड ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रविवार को न्यूनतम तापमान माइनस 3.4 डिग्री और सोमवार को माइनस 1.9 डिग्री दर्ज किया गया. झाड़ियों, घास और फसलों पर ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं. इससे पहले साल 2023 में यहां सबसे कम तापमान माइनस 4.5 डिग्री रहा था. हिमालय से आने वाली बर्फीली हवाओं ने ठंड को और ज्यादा बढ़ा दिया है.
दक्षिण बंगाल के पुरुलिया जिले से भी एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. झालदा के बेगुनकोदर और बंदवान इलाकों में सुबह छप्परों और घास पर सफेद परत जम गई. पहली नजर में यह बर्फबारी जैसी लगी, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे ‘ग्राउंड फ्रॉस्ट’ यानी भूमि तुषार बताया. यह घटना आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में होती है, इसलिए दक्षिण बंगाल में इसका दिखना बहुत ही खास माना जा रहा है.
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में भी सर्दी और गलन का असर साफ दिख रहा है. लोग बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं. घरों में लोग रजाई और कंबल में दुबके हुए नजर आ रहे हैं. डंपर चालक बताते हैं कि कोहरा तो कम हुआ है, लेकिन तेज ठंड और गलन ने काम करना मुश्किल कर दिया है. वे आग जलाकर खुद को गर्म करते हैं और फिर आगे का सफर तय करते हैं.
उत्तर भारत के कई राज्यों में इस समय ठंड अपने चरम पर है. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खास सावधानी रखने की जरूरत है. गर्म कपड़े पहनें, बाहर कम निकलें और खुद को ठंड से बचाएं. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, इसलिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है.
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