
अगस्त महीने की समाप्ति और सितंबर महीने की शुरुआत के साथ जहां बिहार की कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का प्रभाव देखने को मिला. हालांकि, बाढ़ की विभीषिका के बीच इस महीने के दूसरे सप्ताह में बाढ़ के संकट के बीच राहत भरी खबर आई है. राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर स्थिर है और कुछ नदियों का पानी घटने लगा है. मुख्य रूप से गंगा, गंडक, कोसी (वीरपुर बराज), सोन, पुनपुन आदि नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर या तो स्थिर है या फिर घटाव की ओर है.
इन खबरों के बीच राजधानी पटना के लिए भी राहत की खबर आई है. पटना शहर के दक्षिण छोर पर स्थित पुनपुन नदी का जलस्तर बीते दिनों बढ़ने की वजह से जहां, आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. मगर ताजा रिपोर्ट के अनुसार पुनपुन नदी का जलस्तर कई स्थानों पर स्थिर तो कहीं घटाव की ओर है.
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से देर रात राज्य के मुख्य बराज के जलस्तर की स्थिति को साझा करते हुए बताया कि बिहार के वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक का जलस्राव (पानी का बहाव) सोमवार की शाम 6.30 बजे तक 1,14,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर है. इसी तरह कोसी में वीरपुर बराज के पास नदी का जलस्राव 2,02,670 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति घटने की है. वहीं, सोन नदी (इंद्रपुरी बराज) का जलस्राव सुबह 10 बजे 1,33,134 क्यूसेक दर्ज किया गया था और इसकी प्रवृत्ति भी घटने की थी, लेकिन शाम 6.30 बजे इसका जलस्राव 1,33,427 क्यूसेक तक पहुंचने से इसकी प्रवृत्ति बढ़ने की दर्ज की गई.
गंगा-सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा की ओर से सुबह 6 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के जलस्तर की प्रवृत्ति कई स्थानों पर स्थिर तो कहीं घटने की बनी हुई है. बक्सर में जहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 60.32 मीटर से 60.12 मीटर, पटना के मनेर में खतरे के निशान 52 मीटर की तुलना में 53.40 मीटर, जबकि दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 50.45 मीटर की तुलना में 51.54 मीटर है. वहीं, मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 39.33 मीटर की तुलना में 40.08 मीटर के आसपास बह रहा है.
साथ ही, सोन नदी रोहतास के इंद्रपुरी में खतरे के निशान 108.20 मीटर की तुलना में 102.90 मीटर, जबकि पटना के कोइलवर के पास खतरे के निशान 55.52 मीटर की तुलना में 53.8 मीटर के आसपास दर्द किया गया. वहीं, पटना में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान 50.60 मीटर की तुलना में 53.55 मीटर के आसपास है, जो मोटे तौर पर अगर कहा जाए तो इन तीनों नदियों के जलस्तर में घटाव के साथ कई जगहों पर स्थिरता बनी हुई है.
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बिहार की नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण राज्य के 13 जिलों—पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल—के 77 प्रखंडों में 438 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत लगभग 29.13 लाख जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित हुई है. वहीं, इस बाढ़ की वजह से हजारों एकड़ की खरीफ सीजन की फसल बर्बाद होने की संभावना है. अभी सरकार द्वारा खेती प्रभावित होने को लेकर कोई आकलन नहीं किया गया है.
वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग जिलों में कुल 238 कम्युनिटी किचन का संचालन किया जा रहा है और अब तक लगभग 5.12 लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है. इसके अतिरिक्त राज्य भर में 12 राहत शिविरों का संचालन हो रहा है, जहां 7,368 से भी ज्यादा बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा इत्यादि की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है.