El Nino: मई से जुलाई तक अल नीनो की चेतावनी, भारत में हीटवेव और सूखे का बढ़ेगा खतरा

El Nino: मई से जुलाई तक अल नीनो की चेतावनी, भारत में हीटवेव और सूखे का बढ़ेगा खतरा

मध्य पूर्व के तनाव के बीच अल नीनो के सक्रिय होने की आशंका बढ़ी. भारत और एशिया में गर्मी, सूखा, ऊर्जा संकट और खाने-पीने की महंगाई बढ़ने का खतरा.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 06, 2026,
  • Updated May 06, 2026, 11:44 AM IST

मध्य पूर्व में तनाव के बीच भारत सहित एशिया के कई देशों पर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. अल नीनो के एक्टिव होने का सीधा मतलब है तेल-गैस जैसी ऊर्जा की मांग का बढ़ना, पनबिजली पर दबाव और फसलों का नुकसान. अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जिससे जलवायु पर बहुत खतरनाक प्रभाव होता है. इससे हवा की गति, हवा के दबाव और बारिश के पैटर्न पर गंभीर असर होता है.

पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने बताया कि दुनिया में अल नीनो की स्थिति मई से जुलाई के बीच बन सकती है. वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन यानी WMO ने भी कहा है कि शुरुआती संकेत बताते हैं कि अल नीनो का असर मजबूत होगा. कुछ परिस्थितियों में यह सुपर अल नीनो भी हो सकता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने इस शब्द का अभी इस्तेमाल नहीं किया है.

हीटवेव और सूखे का खतरा

अल नीनो की यह खबर भारत सहित एशिया के देशों के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि इस पूरे इलाके में अल नीनो के कारण हीटवेव, सूखा और भारी बारिश का प्रभाव देखा जाता रहा है. अल नीनो की स्थिति बनने के बाद मौसम के परंपरागत पैटर्न में बदलाव होता है जिससे सामान्य बारिश नहीं होती. यहां तक कि जहां बारिश नहीं चाहिए वहां होती है.

अल नीनो की घटना हर दो से सात साल पर देखी जाती है और इसका पूर्वानुमान समुद्र के तापमान पर निर्भर होता है. ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट साइंटिस्ट पीटर वैन रेंच ने 'जापान टाइम्स' से कहा कि इस बार का अल नीनो 1997-98 की घटना दोहरा सकता है, और उस साल का अल नीनो सबसे मजबूत था.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

पीटर वैन रेंच हालांकि कुछ अनिश्चितताओं के बारे में भी इशारा करते हैं. उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि ये भी संभव है कि अल नीनो बिल्कुल एक्टिव ना हो. 1997 के अल नीनो के विनाशकारी प्रभाव हुए थे, जिनमें इंडोनेशिया में भीषण सूखा और विनाशकारी जंगल की आग शामिल थी, जिसने लाखों हेक्टेयर जमीन को जलाकर राख कर दिया और वायु प्रदूषण पैदा किया.

अल नीनो का यह संभावित खतरा ऐसे समय में सामने है जब पश्चिम एशिया के तनाव ने तेलों की सप्लाई को जोखिम में डाल रखा है. पश्चिम एशिया के तनाव से खाद का संकट देशों के सामने है. होर्मुज स्ट्रेट से कृषि जरूरतों के कई सामान पार होते हैं जिनकी सप्लाई खतरे में पड़ी है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया तब से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है जिससे तेल सहित कई जरूरी सामानों की सप्लाई पर संकट है.

खेती-बाड़ी पर कई खतरे

इस हालात में अगर अल नीनो एक्टिव होता है तो ऊर्जा की जरूरतें बढ़ेंगी जबकि उसकी मांग पूरा करने के लिए तेल और गैस की सप्लाई कम रहेगी. एक तरफ गर्मी बढ़ेगी तो दूसरी ओर उसे ठंडा करने के साधनों की कमी रहेगी.

ज्यादा गर्मी और सूखा पड़ने से खेती-बाड़ी के लिए नए खतरे पैदा होंगे. खेती पहले से ही दबाव में है, क्योंकि ईरान की लड़ाई की वजह से खेती में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद और ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं.

खाद संकट से पैदावार में गिरावट

फिच सॉल्यूशंस रिसर्च कंपनी की एक यूनिट, BMI ने चेतावनी दी है, "अगर फसलों की कीमतें इतनी नहीं बढ़तीं कि इन बढ़ी हुई लागतों और शिपिंग खर्चों की भरपाई हो सके, तो किसानों का मुनाफा कम हो जाएगा. इससे खाद का इस्तेमाल कम होने और पैदावार घटने की संभावना बढ़ जाएगी."

"इससे खाने-पीने की चीजों की महंगाई और बढ़ जाएगी, और खाने की कमी की समस्या और भी गंभीर हो जाएगी—खासकर उन देशों में जो आयात पर निर्भर हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं."

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