Monsoon: भीषण गर्मी के बीच मॉनसून का इंतजार, केरल और दिल्ली में इस तारीख को होगी एंट्री!

Monsoon: भीषण गर्मी के बीच मॉनसून का इंतजार, केरल और दिल्ली में इस तारीख को होगी एंट्री!

भीषण गर्मी के बीच दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून के जल्दी आने के संकेत मिले हैं. IMD के अनुसार केरल में जून की शुरुआत में मॉनसून पहुंच सकता है, हालांकि इस साल सामान्य से कम बारिश और अल नीनो का असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

IMD sees weaker monsoon at 92% of average; El Nino impact expectedIMD sees weaker monsoon at 92% of average; El Nino impact expected
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 05, 2026,
  • Updated May 05, 2026, 4:55 PM IST

देश के बड़े हिस्से इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं. ऐसे में अब सबकी निगाहें दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून पर टिकी हुई हैं, जो भारत की सालाना बारिश का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा लेकर आता है. मॉनसून न केवल खेती‑किसानी के लिए, बल्कि पीने के पानी की उपलब्धता, जलाशयों के जलस्तर और बिजली की मांग के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है.

केरल में जून की शुरुआत में पहुंच सकता है मॉनसून

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून इस साल अपनी सामान्य तारीख के आसपास, यानी जून की शुरुआत में केरल के तट पर पहुंचने की संभावना है. हालांकि, कुछ वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि इस बार मॉनसून थोड़ा पहले भी दस्तक दे सकता है.

IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि मॉनसून की बारिश 14 से 20 मई के बीच अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में शुरू हो सकती है. यह देश की मुख्य भूमि की ओर मॉनसून की यात्रा का पहला और अहम फेज होता है.

मॉनसून के आने की सामान्य तारीखें

सामान्य तौर पर दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून देश में एक तय ट्रेंड से आगे बढ़ता है.

  • केरल: लगभग 1 जून
  • मुंबई: करीब 10 जून
  • मध्य भारत: जून के मध्य में
  • दिल्ली‑एनसीआर: 27 से 30 जून के बीच
  • पूरा देश: लगभग 15 जुलाई तक

IMD का कहना है कि मॉनसून उत्तर की ओर चरणों या “लहरों” में बढ़ता है. इसकी रफ्तार और दिशा समुद्र की सतह के तापमान, हवाओं के रुख, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों पर निर्भर करती है.

क्या इस बार मॉनसून समय से पहले आएगा?

हालांकि मौसम विभाग ने अभी आधिकारिक तौर पर जल्दी मॉनसून आने की घोषणा नहीं की है, लेकिन यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम‑रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) समेत कई अंतरराष्ट्रीय मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि मॉनसून मई के आखिरी हफ्ते तक केरल पहुंच सकता है.

कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगर मौसम की स्थिति अनुकूल रही, तो मॉनसून की गतिविधियां 18 मई तक अंडमान क्षेत्र में सक्रिय हो सकती हैं और वहां से तेजी से दक्षिण भारत की ओर बढ़ सकती हैं.

हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में मॉनसून का जल्दी पहुंचना पूरे देश में भी उसकी तेज रफ्तार की गारंटी नहीं होता. कई बार शुरुआती बारिश के बाद हवाओं की दिशा बदलने से मॉनसून की गति धीमी भी पड़ जाती है.

इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान

IMD ने अप्रैल में जारी अपने पहले लंबी अवधि के पूर्वानुमान में बताया था कि जून से सितंबर के बीच मॉनसून सीजन में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. अनुमान के मुताबिक, इस बार कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 92 प्रतिशत रह सकती है.

मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि मॉनसून सीजन के दौरान जुलाई के आसपास अल नीनो की स्थिति बन सकती है, जिससे देश के अलग‑अलग हिस्सों में बारिश होने पर असर पड़ सकता है.

मई में लू से मिल सकती है राहत

IMD को उम्मीद है कि मई महीने में प्री‑मॉनसून बारिश कई इलाकों में सामान्य से लेकर सामान्य से ज्यादा रह सकती है. इससे मौजूदा गर्मी और लू से कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है. 

खेती और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है मॉनसून

दक्षिण‑पश्चिम मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक समय पर बारिश पर निर्भर करती है. जलाशयों और बांधों का जलस्तर मॉनसून से तय होता है और पनबिजली बनाने और ग्रामीण मांग भी अच्छी बारिश से सीधे जुड़ी होती है.

कुल मिलाकर, देश इस समय गर्मी से जूझ रहा है और मॉनसून से बड़ी उम्मीदें हैं. भले ही इसके जल्दी आने के संकेत मिल रहे हों, लेकिन असली तस्वीर मॉनसून की कुल मात्रा और सब जगह बराबर बारिश होने पर निर्भर करेगी. आने वाले हफ्तों में IMD के अगले पूर्वानुमान इस बारे में और साफ तस्वीर पेश करेंगे.

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