मई 2026 का मौसम पूर्वानुमान जारी, IMD का El Nino-IOD पर बड़ा अपडेट, किसानाें को रहना होगा सावधान

मई 2026 का मौसम पूर्वानुमान जारी, IMD का El Nino-IOD पर बड़ा अपडेट, किसानाें को रहना होगा सावधान

IMD Weather Forecast: आईएमडी के मई 2026 आउटलुक में मौसम का मिला-जुला असर सामने आया है. कुछ इलाकों में ज्यादा गर्मी और लू, तो अधिकतर हिस्सों में अच्छी बारिश का अनुमान है. बदलते समुद्री संकेतों के बीच खेती पर असर पड़ सकता है, ऐसे में किसानों को जरूरी तैयारी करने की सलाह दी गई है.

IMD Weather Outlook May 2026 Heavy Rain and Heatwave AlertIMD Weather Outlook May 2026 Heavy Rain and Heatwave Alert
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 01, 2026,
  • Updated May 01, 2026, 2:07 PM IST

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने मई 2026 का वेदर आउटलुक जारी कर दिया है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मई में देश में मौसम का मिश्रित असर देखने को मिलेगा. कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है, लेकिन दक्षिण भारत, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर जाने का अनुमान है. वहीं, न्यूनतम तापमान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे रात की गर्मी भी बनी रहेगी.

अल नीनो और IOD दिखाएंगे असर!

आईएमडी ने कहा है कि मई में वेदर सिस्‍टम में बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं. प्रशांत महासागर में ENSO न्यूट्रल स्थिति धीरे-धीरे अल नीनो की ओर बढ़ रही है और मॉनसून के दौरान इसके विकसित होने की संभावना है. वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल IOD है, जो मॉनसून के अंत तक पॉजिटिव हो सकता है. ये दोनों फैक्टर आगे के मौसम पैटर्न को प्रभावित करेंगे.

दिन-रात दिखेगा गर्मी-लू का असर

आईएमडी ने कहा है कि मई में तापमान-लू का असर कई क्षेत्रों में एक साथ देखने को मिलेगा. हिमालय की तराई, पूर्वी तटीय राज्य, गुजरात और महाराष्ट्र में सामान्य से ज्यादा हीटवेव दिन रहने का अनुमान है. जहां दिन का तापमान बढ़ेगा, वहीं रात का तापमान भी ज्यादा रहने से गर्मी से राहत नहीं मिलेगी. इससे पानी की मांग, बिजली खपत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं. लगातार गर्मी रहने से मिट्टी की नमी तेजी से घटेगी और फसलों पर दबाव बढ़ेगा.

मई में देशभर में ऐसा रहेगा बारिश का ट्रेंड

आईएमडी के मुताबिक, मई में पूरे देश में औसतन सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जो 110 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है. अधिकांश हिस्सों में सामान्य से ज्यादा या सामान्य बारिश होगी, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों और पूर्व-मध्य भारत में कम बारिश की संभावना है. यह बारिश खरीफ सीजन की तैयारी में मदद करेगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में परेशानी भी बढ़ा सकती है.

खेती पर तापमान और लू का असर

आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में साफ चेतावनी दी है कि बढ़ा हुए तापमान और लू का असर खेती पर साफ नजर आएगा. मौसम विभाग ने कहा है कि 

  • उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में जहां तापमान थोड़ा कम रहेगा, वहां रबी फसलों की कटाई और मड़ाई के लिए स्थिति अनुकूल रहेगी. लेकिन जहां तापमान बढ़ा रहेगा और लू चलेगी, वहां धान, मक्का, दालें और सब्जियों में फूल गिरने और दाना बनने में कमी आ सकती है.
  • रात का ज्यादा तापमान फसलों में श्वसन हानि बढ़ाएगा, जिससे उत्पादन घट सकता है.
  • हीटवेव वाले क्षेत्रों में मिट्टी की नमी तेजी से घटेगी और सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी.
  • आम, केला, टमाटर और मिर्च जैसी फसलों में सनबर्न और फल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है.

मई में बारिश का खेती पर असर

बारिश का असर दो तरह से देखने को मिलेगा. एक ओर जहां कुछ जगहों पर वर्तमान में लगी फसलों पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहेगी तो वहीं दूसरी ओर, खरीफ सीजन के लिए यह राहत भरी साबित होगी.

ज्यादा बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी और खरीफ की तैयारी आसान होगी. लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और फफूंद रोगों का खतरा बढ़ सकता है. देर से कटने वाली रबी फसलों की मड़ाई प्रभावित हो सकती है. वही, कम बारिश वाले क्षेत्रों में नमी की कमी से फसल पर असर पड़ सकता है.

किसानों के लिए जरूरी सलाह

  • मौसम के इस मिश्रित असर को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
  • फसलों में हल्की और बार-बार सिंचाई करें, खासकर संवेदनशील चरणों में.
  • मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की नमी बनाए रखें.
  • गर्मी से बचाव के लिए एंटी-ट्रांसपिरेंट का उपयोग करें.
  • खेतों में काम सुबह और शाम के समय करें.
  • पशुओं को छाया और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं.
  • ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था रखें.
  • कीट और रोगों की निगरानी बढ़ाएं.

मई 2026 का मौसम खेती के लिए संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थिति बना रहा है. जहां एक तरफ बारिश राहत दे सकती है, वहीं तापमान और लू का असर फसलों पर दबाव बढ़ाएगा. ऐसे में मौसम के अनुसार रणनीति अपनाना ही किसानों के लिए सबसे जरूरी रहेगा.

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