
देश में फरवरी के आखिरी दिनों के साथ ही मौसम का रुख तेजी से बदलता दिख रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा विस्तारित पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 फरवरी से 11 मार्च के बीच देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जबकि बारिश की गतिविधियां सीमित ही रहेंगी. मार्च की शुरुआत में खासकर उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत में गर्मी का असर और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. आगामी दो हफ्तों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है.
मध्य भारत और महाराष्ट्र में भी तापमान में लगातार इजाफा दर्ज होने का अनुमान है. मौसम विभाग के अनुसार, हफ्ते के अंत तक उत्तर, मध्य, पूर्व और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच सकता है. इसका सीधा मतलब है कि मार्च की शुरुआत इस बार अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म रह सकती है.
पहले हफ्ते यानी 26 फरवरी से 4 मार्च के बीच कुछ मौसमी सिस्टम सक्रिय रहेंगे, लेकिन इनका असर सीमित इलाकों तक ही रहेगा. अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है.
इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. वहीं, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 2 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है.
दूसरे हफ्ते यानी 5 से 11 मार्च के दौरान भी मौसम का यही रुख बना रहने का अनुमान है. पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में कुछ दिनों तक हल्की बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है. सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी अलग-अलग दिनों में हल्की वर्षा के संकेत हैं. हालांकि, देश के अधिकांश हिस्सों में इस अवधि के दौरान बारिश सामान्य से कम ही रहने की संभावना जताई गई है.
तापमान के लिहाज से दूसरा हफ्ता और अधिक अहम माना जा रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ऊपर रह सकता है. केवल मध्य और उससे सटे कुछ प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य के आसपास या थोड़ा कम रहने की संभावना है. न्यूनतम तापमान की बात करें तो उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में रात के समय अपेक्षाकृत अधिक गर्मी रह सकती हैं, जबकि पूर्व, मध्य और दक्षिण भारत में न्यूनतम तापमान में हल्की गिरावट देखी जा सकती है.
वहीं, बीते हफ्ते की बात करें तो मौसम में अस्थिरता साफ देखने को मिली. बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया के चलते अंडमान-निकोबार में बारिश दर्ज की गई, जबकि केरल और माहे में कुछ दिनों तक भारी बारिश हुई. उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में ओलावृष्टि की घटनाएं भी सामने आईं. इसके बावजूद देशभर में साप्ताहिक और मौसमी बारिश दोनों ही सामान्य से काफी कम रही.
फरवरी के अंत के साथ ही सर्दी का असर लगभग खत्म हो चुका है और मार्च की शुरुआत गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क रहने वाली है. खेती-किसानी, जल प्रबंधन और स्वास्थ्य के लिहाज से आने वाले दो हफ्तों खास सतर्कता बरतने की जरूरत है. बढ़ता तापमान और कम बारिश कई क्षेत्रों में असर दिखा सकते हैं.