किसानों के लिए बड़ी एडवाइजरी जारी, सिंचाई, बुवाई और कीट‑प्रबंधन को लेकर जरूरी सलाह

किसानों के लिए बड़ी एडवाइजरी जारी, सिंचाई, बुवाई और कीट‑प्रबंधन को लेकर जरूरी सलाह

पूसा, नई दिल्ली ने किसानों के लिए मौसम आधारित एडवाइजरी जारी की है. बढ़ते तापमान के मद्देनजर हल्की सिंचाई, मूंग‑उड़द की बुवाई के लिए उपयुक्त किस्में, सब्जियों में कीट नियंत्रण, गेहूं में रतुआ रोग प्रबंधन और भिंडी और अन्य सब्जियों की बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं.

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किसानों के लिए बड़ी एडवाइजरी जारी, सिंचाई, बुवाई और कीट‑प्रबंधन को लेकर जरूरी सलाहपूसा नई दिल्ली एडवाइजरी

पूसा, नई दिल्ली ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि इस सप्ताह तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह है कि खड़ी फसलों और सब्जियों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें. सिंचाई ऐसे समय पर करें जब हवा शांत हो, नहीं तो पौधे गिरने की संभावना रहती है.

इस मौसम में मूंग और उड़द की फसलों की मार्च में बुवाई के लिए किसान किसी प्रमाणित स्रोत से उन्नत बीजों को जमा करें. मूंग की किस्में पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल-32 और उड़द की किस्में पंत उड़द 19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35 बेहतर उपज वाली हैं. बुवाई से पहले बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम और फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बैक्टीरिया से जरूर उपचार करें.

किसानों को सलाह

मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि भिंडी की अगेती बुवाई के लिए ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई करें. बुवाई से पहले खेतों में पर्याप्त नमी का ध्यान रखें. बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा. प्रति एकड़ रखें.

मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूं की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें. काला, भूरा या पीला रतुआ आने पर फसल में प्रोपिकोनेजोल 25 EC (1.0 ml/लीटर पानी) का छिड़काव करें. पीला रतुआ के लिए 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है. 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से ऊपर रोग का फैलाव नहीं होता. भूरा रतुआ के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमीयुक्त जलवायु आवश्यक है. काला रतुआ के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान और नमी रहित जलवायु आवश्यक है.

चेपा की निगरानी करें

मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान सभी सब्जियों और सरसों की फसल में चेपा के आक्रमण की निगरानी करें. इस कीट के नियंत्रण के लिए वे सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड @ 0.25-0.5 मि.ली./लीटर पानी की दर से सब्जियों की तुड़ाई के बाद करें. सब्जियों की फसलों पर छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक तुड़ाई न करें. बीज वाली सब्जियों पर चेपा के आक्रमण पर विशेष ध्यान दें.

मौसम को ध्यान में रखते हुए फ्रेंच बीन, गर्मी के मौसम वाली मूली इत्यादि की सीधी बुवाई के लिए वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त है. किसान उन्नत बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से ही प्राप्त करें.

मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान टमाटर, मिर्च, कदूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई इस सप्ताह कर सकते हैं. इस मौसम में प्याज की समय से बोई गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें. कीट के पाए जाने पर कानफीडोर @0.5 मिली./3 ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि (1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें.

फली छेदक कीट से बचाव

मौसम को ध्यान में रखते हुए टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाव के लिए किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाएं. वे कीट से नष्ट फलों को इक‌ट्ठा कर जमीन में दबा दें. साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी के लिए फिरोमोन ट्रैप @ 4-5 ट्रैप प्रति एकड़ की दर से लगाएं.

इस मौसम में बैंगन की फसल को प्ररोह और फल छेदक कीट से बचाव के लिए ग्रसित फलों और प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें. यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @1.0 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

इस मौसम में गेंदे में पुष्प सड़न रोग के आक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए किसान फसल की निगरानी करते रहें. यदि लक्षण दिखाई दें तो कार्बडीजम 50% WP @ 1.0 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

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