IMD की भविष्यवाणी, कम बर्फबारी का बाद में मिलेगा फायदा, मॉनसून के दौरान अच्छी हो सकती है बारिश

IMD की भविष्यवाणी, कम बर्फबारी का बाद में मिलेगा फायदा, मॉनसून के दौरान अच्छी हो सकती है बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा कि पिछले साल पूरे सीजन में मानसून 6 प्रतिशत कम था. जुलाई और सितंबर में 13 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी. जबकि जून में 9 प्रतिशत और अगस्त में 36 प्रतिशत बारिश में कमी देखी गई.

इस साल अच्छी हो सकती है बारिश. (सांकेतिक फोटो)इस साल अच्छी हो सकती है बारिश. (सांकेतिक फोटो)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 20, 2024,
  • Updated Jan 20, 2024, 12:42 PM IST

इस साल हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित अधिकांश पहाड़ी राज्यों में काफी कम बर्फबारी हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि कम बर्फबारी होना सेब जैसी कुछ बागवानी फसलों के लिए चिंता का विषय है. लेकिन किसानों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. इसका एक सकारात्मक पक्ष भी है. कम बर्फबारी का सीधा असर मानसून पर पड़ सकता है, जिससे अच्छी बारिश होगी. ऐसे में अलनीनो का प्रकोप कम हो जाएगा और खरीफ सीजन में अच्छी बारिश से फसलों का बंपर उत्पादन होगा. ऐसे भी सरकार के लिए 2024 में सामान्य मानसून बहुत जरूरी हो गया है, क्योंकि पिछले साल औसत से काफी कम बारिश हुई थी.

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा कि बीते दिसंबर से लेकर अब तक, पश्चिमी विक्षोभ नहीं आया है. इससे पश्चिमी हिमालय क्षेत्र प्रभावित हुआ है. वहीं, दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश हुई. इसके चलते इस महीने उत्तराखंड को छोड़कर बाकी पहाड़ी राज्यों में लगभग सूखे जैसे लाहात रहे. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि यदि इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी कम हुई है, तो अगला मानसून बेहतर होगा. 

पूरे सीजन में 6 प्रतिशत कम बारिश

एम महापात्र ने कहा कि पिछले साल पूरे सीजन में मानसून 6 प्रतिशत कम था. जुलाई और सितंबर में 13 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी. जबकि जून में 9 प्रतिशत और अगस्त में 36 प्रतिशत बारिश में कमी देखी गई. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगस्त में बारिश जून के स्तर के समान होती तो मानसून सामान्य हो सकता था. कर्नाटक और महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कम बारिश हुई थी.

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वहीं, आईएमडी का मानना है कि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर डिपोल (आईओडी) में ईएनएसओ स्थितियों के बाद, तीसरी बड़े पैमाने की प्रक्रिया है, जो भारतीय मानसून को भी नियंत्रित करती है. वह यूरेशियन स्नो कवर (ईएससी) है, जो 2022-23 की सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) में कम थी. प्रमुख वैश्विक पूर्वानुमानकर्ताओं द्वारा इस वर्ष (2024) भारत के लिए गर्मियों के मौसम के पहले उपलब्ध अनुमानों से क्षेत्रीय रूप से परिवर्तनशील गर्म परिस्थितियों और फरवरी से मई तक सामान्य से सामान्य से अधिक वर्षा का संकेत मिलता है क्योंकि वर्तमान में मजबूत अल नीनो की स्थिति मध्यम है.

अप्रैल में जारी करेगा भविष्यवाणी

आगामी मानसून के पहले दो महीनों (जून और जुलाई) में भी सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, कम से कम एक मॉडल से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति अगस्त में भी जारी रह सकती है. हालांकि, ये पूर्वानुमान भरोसेमंद हो सकते हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग अप्रैल के मध्य तक इस सीजन के लिए अपना पहला भविष्यवाणी जारी करेगी.

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