IMD का बड़ा अलर्ट: जून 2026 में अल नीनो सक्रिय, मॉनसून पर पड़ सकता है असर

IMD का बड़ा अलर्ट: जून 2026 में अल नीनो सक्रिय, मॉनसून पर पड़ सकता है असर

भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट में जून 2026 के लिए अल नीनो की पुष्टि की गई है. प्रशांत महासागर में तेजी से बदलते हालात मॉनसून को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि हिंद महासागर में IOD अभी सामान्य बना हुआ है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 12, 2026,
  • Updated Jun 12, 2026, 5:50 PM IST

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून 2026 के लिए ENSO (एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन) और IOD (इंडियन ओशन डाइपोल) पर अपनी ताजा बुलेटिन जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति आधिकारिक तौर पर बन चुकी है, जो आने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को प्रभावित कर सकती है.

अल नीनो के साफ संकेत, तापमान में तेज बढ़ोतरी

IMD के अनुसार, मई 2026 में मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान तेजी से बढ़ा है. तीन महीने (अप्रैल-मई-जून) का औसत तापमान +0.5°C से ऊपर चला गया है, जो अल नीनो के घोषित होने की अहम सीमा मानी जाती है. सिर्फ सतह ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराई (थर्मोक्लाइन तक) में भी गर्म पानी की स्थिति देखी जा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकेत है कि अल नीनो आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है, और जुलाई से सितंबर के बीच इसके मध्यम से तेज स्तर तक पहुंचने की संभावना है.

मॉनसून पर पड़ सकता है असर

अल नीनो का सीधा असर भारत के मॉनसून पर पड़ता है. आमतौर पर, यह स्थिति बारिश को कमजोर कर सकती है या बारिश असमान रूप से हो सकती है. IMD के मॉनसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार, जैसे-जैसे मॉनसून आगे बढ़ेगा, अल नीनो की स्थिति और स्पष्ट और मजबूत होती जाएगी जिससे मॉनसून की तेजी प्रभावित हो सकती है.

IOD फिलहाल सामान्य, राहत की सीमित उम्मीद

जहां एक ओर प्रशांत महासागर में हलचल है, वहीं हिंद महासागर की स्थिति अभी स्थिर बनी हुई है. IMD ने बताया कि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है. दिसंबर 2025 में खत्म हुए नेगेटिव IOD के बाद से जनवरी 2026 से यह सामान्य स्तर पर बना हुआ है. हालांकि मई में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में तापमान औसत से थोड़ा अधिक रहा, फिर भी DMI (डाइपोल मोड इंडेक्स) सामान्य दायरे में है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर IOD पॉजिटिव होता, तो यह अल नीनो के सूखे वाले असर को कुछ हद तक कम कर सकता था. लेकिन फिलहाल न्यूट्रल स्थिति का मतलब है कि मॉनसून पर अल नीनो का असर ज्यादा स्पष्ट रूप से दिख सकता है.

एडवांस्ड मॉडल से अनुमान

IMD ने इस पूर्वानुमान के लिए हाई-रिजॉल्यूशन MMCFS मॉडल का इस्तेमाल किया है. इसमें समुद्र और हवा दोनों के डेटा का विश्लेषण, 1999 से 2008 के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर सुधार (Bias Correction) और प्रोबेबिलिटी मॉडलिंग शामिल की गई है. इन मॉडल्स के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 में प्रशांत महासागर में गर्मी (SST anomalies) और बढ़ेगी जिससे अल नीनो और मजबूत हो सकता है.

आगे क्या होगा?

IMD ने साफ किया है कि वह हर महीने स्थिति पर नजर रखेगा, नियमित अपडेट जारी करेगा, कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों को समय-समय पर अलर्ट देगा. संक्षेप में कहें तो जून 2026 में अल नीनो की आधिकारिक पुष्टि हो गई है, मॉनसून सीजन में इसके और मजबूत होने की संभावना है. साथ ही, IOD अभी न्यूट्रल है, इसलिए राहत की संभावना कम है. लोगों के लिए सलाह है कि मॉनसून पर असर को लेकर सतर्कता जरूर बरतें.(अनमोल नाथ बाली की रिपोर्ट)

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