
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल अल नीनो के एक्टिव होने की संभावना जताई है. दरअसल, IMD ने कहा है कि इस बात पर वैश्विक सहमति है कि जुलाई-अगस्त-सितंबर की अवधि के दौरान अल नीनो एक्टिव हो सकता है, लेकिन अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में, जो नहर या भूजल से सिंचित हैं. वहां अगले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में सामान्य से कम बारिश का भी अनुमान लगाया है.
जनवरी-मार्च के सर्दियों के मौसम के दौरान मौसम के पूर्वानुमान के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए, IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अधिकांश मॉडलों ने भविष्यवाणी की है कि 68 प्रतिशत संभावना है कि ला नीना मार्च 2026 तक ENSO-न्यूट्रल में बदलने से पहले 1 या 2 महीने तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि लेकिन, जुलाई-सितंबर के दौरान, जो भारत के मॉनसून के मौसम के साथ मेल खाता है, ENSO-न्यूट्रल अल नीनो में बदल सकता है.
उन्होंने कहा कि ENSO न्यूट्रल स्थितियां जून-जुलाई तक हावी रहने की संभावना है. लेकिन, उन्होंने आगे कहा कि अल नीनो के बारे में भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी. हालांकि, ला नीना के जारी रहने के बारे में अधिकांश भविष्यवाणियां (6 महीने पहले) भी सही साबित हुईं हैं. स्प्रिंग बैरियर अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) एक मौसम प्रणाली है, जिसे भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान पर मापा जाता है और एक सीमा से अधिक गर्म तापमान को अल नीनो घोषित किया जाता है. साथ ही एक निश्चित स्तर से कम तापमान को ला नीना कहा जाता है.
महापात्रा ने यह भी कहा कि एक घटना होती है जिसे स्प्रिंग बैरियर कहा जाता है, जो फरवरी में होती है. उन्होंने कहा कि एक बार जब वह रुकावट दूर हो जाएगी, तो मार्च के डेटा से ENSO पर किए गए पूर्वानुमानों की विश्वसनीयता ज्यादा होगी. Severe Weather Europe, जो एक यूरोपियन मौसम और जलवायु विश्लेषण प्लेटफॉर्म है, उसने कहा है कि उसके लेटेस्ट अनुमानों से पता चलता है कि अल नीनो 2026 में वापस आएगा. साल के दूसरे छमाही में तेज़ होगा और 2026-27 सीज़न तक बना रहेगा.
IMD DG ने यह भी कहा कि 2025 देश में 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म साल था, जिसमें औसत तापमान 25.37 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो औसत (1991-2020 के दौरान) से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल 2024 था, जब सालाना औसत तापमान सामान्य से 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी में सामान्य से तीन ज्यादा शीतलहर वाले दिन हो सकते हैं, खासकर मध्य और पूर्वी भारत में, जिससे गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों को मदद मिल सकती है.
चूंकि इस महीने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, इसलिए किसानों को अपनी जमीन की सिंचाई के लिए ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है, क्योंकि ये देश के शीर्ष गेहूं उगाने वाले क्षेत्र हैं. जनवरी में मासिक न्यूनतम तापमान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम रहने की संभावना है, सिवाय उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, जहां सामान्य से ज़्यादा तापमान का अनुमान है.