
देश के मौसम को लेकर अहम संकेत सामने आए हैं. मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले महीनों की बारिश, ठंड और तापमान को लेकर अनुमान जारी कर दिए हैं. यह अनुमान न सिर्फ मौसम के मिजाज को समझने में मदद करने वाले हैं बल्कि बल्कि रबी की फसल और आगामी मॉनसून सीज़न के लिहाज से भी बेहद अहम माने जा रहे हैं. मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया है कि जनवरी से मार्च के बीच दक्षिणी और मध्य भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना है. वहीं उत्तर-पश्चिमी भारत के पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.
मौसम विज्ञान विभाग के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा ने साफ किया है कि बारिश का रबी की फसलों पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उत्तर-पश्चिमी भारत में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था है और बीते मॉनसून के दौरान अच्छी बारिश होने से जलाशय भी भर चुके हैं.महापात्रा ने बताया कि उत्तर-पूर्व भारत, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन तक ठंडे दिन बने रह सकते हैं जबकि राजस्थान में ठंडे दिनों की संख्या कम रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि जनवरी महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है. हालांकि उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ इलाकों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है.
मौसम विभाग के अनुसार दिसंबर में करीब सूखे जैसे हालात रहे जिनका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ की कमी रही. आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत में बारिश और आंधी-तूफान लाते हैं. महापात्रा ने बताया कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर खिसक गए या फिर बहुत तेजी से आगे बढ़ गए.इस बदले हुए पैटर्न के पीछे जलवायु परिवर्तन को एक अहम वजह बताया. वहीं, दिसंबर से मार्च के बीच कम बर्फबारी होना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान अच्छी बारिश के संकेतों में से एक माना जा रहा है.महापात्र ने बताया कि फिलहाल ला नीना की स्थिति बनी हुई है जिसमें इक्वेटोरियल पैसिफिक क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान ठंडा रहता है. ग्लोबल पूर्वानुमान मॉडल्स के मुताबिक मार्च तक ENSO न्यूट्रल कंडीशन रहने की संभावना है.
उन्होंने कहा कि ENSO न्यूट्रल स्थिति जून-जुलाई तक बनी रह सकती है जिसे अच्छे मॉनसून की ओर इशारा माना जाता है. तापमान के आंकड़ों पर बात करते हुए महापात्र ने बताया कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म साल रहा.इस दौरान पूरे भारत का सालाना औसत सतही वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा. रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2024 सबसे गर्म साल था. उस साल पूरे भारत का औसत तापमान लंबे समय के औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया. उन्होंने बताया कि सर्दियों (जनवरी-फरवरी) और प्री-मॉनसून (मार्च-मई) के दौरान मौसमी औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा. इसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) और पोस्ट-मॉनसून (अक्टूबर-दिसंबर) सीज़न के दौरान औसत तापमान लंबे समय के औसत के करीब ही रहा. इस दौरान तापमान में क्रमशः 0.09 डिग्री सेल्सियस और माइनस 0.1 डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया गया.
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