
मॉनसून के जाने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी हैं. राजस्थान में इस साल बारिश ने अगस्त के महीने में सबसे ज्यादा निराश किया. वहीं, सितंबर के पहले हफ्ते में भी पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं छुटपुट बारिश हुई है. लेकिन प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में बरसात नहीं होने के कारण फसलें सूख गई हैं. ज्यादातर फसलों में 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है. हालांकि मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में इस तरह का कोई पूर्वानुमान नहीं है. इसीलिए बाजरा, मूंग, कपास सहित कई खरीफ फसलों में वहां सबसे ज्यादा नुकसान देखा जा रहा है.
पिछले 24 घंटों में पश्चिमी राजस्थान के पाली और जोधपुर जिलों में कहीं-कहीं एक सेंटीमीटर से भी कम बारिश हुई है. वहीं, पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में एक से छह सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज हुई है.
मौसम केन्द्र से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल के सर्कुलेशन सिस्टम उड़ीसा, छत्तीसगढ़ के ऊपर बना हुआ है. वहीं, आज मानसून ट्रफ लाइन जैसलमेर, कोटा से होकर गुजर रही है. इसीलिए शुक्रवार को कोटा, उदयपुर व भरतपुर संभाग में संभाग के कुछ भागों में बारिश हो सकती है.
जबकि अजमेर, जयपुर व जोधपुर संभाग में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना विभाग ने जताई है. इसके अलावा कोटा, उदयपुर, भरतपुर व जयपुर संभाग के कुछ भागों में बारिश की गतिविधियां शनिवार नौ सितंबर को भी जारी रहने की संभावना है. बाकी राजस्थान के अधिकांश भागों में मौसम साफ रहेगा. बारिश होने की उम्मीद नहीं है.
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इसी तरह 10 सितंबर से राज्य में बारिश की गतिविधियों में कमी होगी. केवल पूर्वी राजस्थान में छुटपुट बारिश होने की संभावना रहेगी. 13 और 14 सितंबर से पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में एक बार फिर से मानसून सक्रिय होगा. इससे यहां के कुछ भागों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है.
वहीं, अगले दो-तीन दिन में पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिलों में अधिकतम तापमान औसत से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा. इससे गर्मी और उमस बढ़ेगी. गर्मी बढ़ने से फसलों को और ज्यादा नुकसान होने की आशंका है.
अगस्त महीने में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इसका दुष्प्रभाव मूंग पर सबसे ज्यादा आया है. क्योंकि मूंग की फसल 50-60 दिन में तैयार हो जाती है, यह फसल संवेदनशील होने से गर्मी को सहन नहीं कर पाती. इसीलिए अंदेशा है कि मूंग का उत्पादन इस साल 50 प्रतिशत तक कम होगा.