
झारखंड एक बार फिर कमजोर मॉनसून का सामना कर रहा है. पिछले कुछ दिनों से यहां पर लगातार बादल तो छाए हुए हैं हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है पर बारिश नहीं हो रही है. इसके कारण किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है. राज्य के किसान इस बार फिर सूखे की आशंका से डरे हुए हैं और खेती की तैयारी करने से भी डर रहे हैं. क्योंकि उन्हें डर है कि कही इस बार भी बारिश में देरी होती या कम होती है तो उनकी धान की फसल बेकार हो जाएगी. हालांकि कई किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने बताया की उन्होंने नर्सरी तो तैयार की थी, पर पानी के अभाव में अंकुरण भी नहीं हो पाया है. सिंचाई करके नर्सरी तैयार करने की स्थिति में किसान नहीं है क्योंकि उनके पास धान की रोपाई करने के लिए पानी नहीं है.
एक तरफ किसान परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग का अनुमान बता रहा है कि झारखंड में फिलहाल मॉनसून कमजोर है और आने वाले कुछ दिनों तक यह स्थिति रहेगी. हालांकि विभाग का अनुमान है कि 27 जुलाई तक मॉनसून की यही स्थिति रहेगी. राज्य में कहीं कहीं पर रुक-रुक कर गरज के साथ हल्की और मध्यम दर्जे की बारिश होगी. वहीं राज्य भर में पिछले 24 घंटे में हुई बारिश की बात करें तो रांची,जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम में बारिश दर्ज की गई है. इस दौरान रांची में नौ एमएम बारिश दर्ज की गई जबकि जमशेदपुर में 15 एमएम बारिश हुई.
मौसम विभाग की तरफ से अगले एक सप्ताह के लिए जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक 27 जुलाई तक राज्य के सभी जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के चार जिले चतरा, गिरिडीह, धनबाद और जामताड़ा में 60 फीसदी से भी कम बारिश दर्ज की गई है. जबकि 17 जिले ऐसे हैं जहां पर सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं मात्र तीन जिले गोड्डा, साहेबगंग और सिमडेगा में सामान्य बारिश दर्ज की गई है. 23 जुलाई को एक बार फिर राज्य के सभी जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं 25 से 27 जुलाई तक आठ जिलों में बारिश नहीं होने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि यह लागातार दूसरा साल है जब झारखंड के मौसम में ऐसे हालात देखने के लिए मिल रहे हैं. पानी के अभाव में किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं. खेत में लगा बिचड़ा सूख रहा है. अच्छी बारिश नहीं होने के कारण अब तक खेतो में भी सही तरह से नमी नहीं बन पाई है. धान की रोपाई करने का सही समय बीत रहा है. किसानों को कम अवधि वाले धान की रोपाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.