
बीते दो-तीन दिनों में देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, आंधी और तूफान का कहर देखा गया है. मौसम में आए इस अचानक बदलाव से खेतों में खड़ी फसलों पर भारी असर देखा गया है. गेहूं, सरसों, दलहन के अलावा सब्जी फसलों को बहुत नुकसान हुआ है. किसान सोच में पड़ गए हैं कि इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी. किसानों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का सर्वे जल्द कराया जाए और समय पर भरपाई हो. कई किसानों की उपज मंडियों में भीगने से भी खराब हुई है. किसानों का आरोप है कि मंडियों में अनाज रखने की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है जिससे बारिश में उपज खराब हो गई. जहां-जहां फसल खराबे की घटना अधिक हुई है, उसकी जानकारी नीचे दी जा रही है.
हरियाणा के कई जिलों में मंगलवार को बारिश हुई. हिसार जिले में कई स्थानों पर ओलावृष्टि देखी गई. मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा, पंचकूला, यमुनानगर, हिसार, जींद, भिवानी, गुरुग्राम, दादरी में बारिश हुई जबकि हिसार और फतेहाबाद जिले में ओले गिरे. किसानों का कहना है कि ओले गिरने से गेहूं की फसलों का नुकसान हुआ है. तेज आंधी बारिश के कारण गेहूं की फसल खेत में गिर गई. मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि एक अप्रैल को बादल छाए रहेंगे और दो अप्रैल को गरज के साथ बारिश हो सकती है और तीन अप्रैल को हल्की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले समय में पहाड़ों पर चार अप्रैल को बर्फबारी हो सकती है और 5 अप्रैल को भी बारिश की संभावना है. किसान सुभाष वर्मा का कहना था कि बारिश और ओले गिरने गेहूं और सरसों की फसलों को नुकसान हुआ है.
रेवाड़ी जिले की बावल विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. मौसम विज्ञान विभाग पहले ही बारिश का अलर्ट जारी कर चुका था, जो बिल्कुल सही साबित हुआ. ओलों की बौछार से क्षेत्र की सड़कों पर सफेद चादर जैसी परत जम गई, जिससे हालात कुछ देर के लिए बदले-बदले नजर आए.
मौसम की इस मार से किसानों की चिंता बढ़ गई है. गेहूं की फसल पर ओलावृष्टि का सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. कई जगह खड़ी फसल झुक गई है, जिससे पैदावार पर गंभीर असर हो सकता है. खेतों का जायजा लेने पहुंचे किसान नुकसान को लेकर परेशान दिखाई दिए. स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने और नुकसान का आकलन करने के लिए टीमें भेज दी हैं. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में मौसम में और बदलाव की संभावना भी जताई है.
पंजाब के जिला फाजिल्का के अबोहर और जलालाबाद में बुधवार को मौसम पूरी तरह बदल गया और आंधी-तूफान आया. इसके बाद तेज बारिश होती रही जिससे मौसम ठंडा हो गया, लोगों को राहत भी मिली. लेकिन इस बारिश से फसल खराब होने की आशंका है क्योंकि गेहूं की फसलें पक चुकी हैं. आस-पास के गांवों में ओले गिरने की भी घटना हुई, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं. किसानों ने कहा कि बारिश पड़ने से जहां एक तरफ गेहूं की खड़ी फसल को नुकसान होगा, दूसरी तरफ किन्नू की फसल को लाभ भी होगा. गेहूं की जो फसल अनाज मंडी में आनी थी, वह कुछ समय के लिए देर भी हो सकती है. इससे किसानों को काफी नुकसान होगा.
राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी में बारिश के साथ ओले गिरे. ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ. इस समय गेहूं, सरसों और चने की फसलें कटाई के करीब हैं. प्रदेश में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर अप्रैल के पहले सप्ताह में भी रहेगा. इससे पहले मगंलवार को इस सिस्टम का सबसे अधिक प्रभाव रहा. तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई और कई गांवों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई. आसमान में काले बादल छाए रहे और बिजली कड़की. इस बदलाव से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान की आशंका है.
मध्य प्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर झिरन्या विकासखंड के गोराड़िया, अंबा, चिरिया और ढसलगांव में मंगलवार को अचानक मौसम बदला और तेज हवा चलने लगी. भर दोपहरी के बाद अचानक बादल आए और तेज बारिश के साथ अम्बा और ढसलगांव में बारिश शुरू हो गई. वहीं गोराड़िया और सिरवेल में झमाझम बारिश के साथ ओले गिरे. दोपहर 3 तक पारा 38 डिग्री सेल्सियस था और न्यूनतम 20.6 डिग्री था. अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई और कुछ ही देर में झमाझम बारिश के साथ में ओले गिरने लगे. ओले गिरने से और बारिश होने से किसानों को गेहूं और चने की सूखी फसल खराब होने की चिंता सता रही है. वहीं दूसरी ओर बारिश से चुभती गर्मी और पसीने से लोगों को राहत मिली है.
विदर्भ के अकोला, अमरावती समेत पूरे क्षेत्र में मौसम ने एक ही दिन में दो अलग-अलग रंग दिखाए. दिन में जहां तेज धूप और भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल रहा, वहीं शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट बदल ली. तेज हवाएं, बिजली की कड़क और झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन किसानों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी. मौसम विभाग के अनुसार, विदर्भ में सबसे अधिक तापमान वर्धा में 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके बाद नागपुर, अमरावती और अकोला में भी तापमान 41 डिग्री के पार पहुंच गया. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दोपहर में जनजीवन प्रभावित रहा. लेकिन शाम के समय अचानक मौसम बदला और कई इलाकों में तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई. अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में तो दोपहर के वक्त ही जोरदार बारिश हुई, जिससे खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ.
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में सोमवार रात को अचानक चली तूफानी हवाओं के साथ बेमौसम बारिश हुई. इस बारिश ने नांदेड़ शहर, कंधार, लोहा, अर्धापुर, भोकर और हिमायतनगर सहित कई तहसीलो को प्रभावित किया. बारिश से फलों के बागों को नुकसान पहुंचा है, विशेष रूप से आम, खरबूजे और तरबूज जैसी फसलों को. इसके अलावा, गर्मियों की ज्वार (सोरघम) की फसल, जो कटाई के लिए तैयार थी, पूरी तरह से जमीन पर बिछ गई. नांदेड़ जिले को इस बेमौसम मौसम का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा है. बारिश ने पूरी रात जिले को भिगोए रखा. तूफानी हवाओं और भारी बारिश के मेल से गेहूं, ज्वार, आम, मक्का और कटाई के बाद रखे हल्दी के भंडार सहित विभिन्न कृषि उत्पादों को भारी नुकसान पहुंचा.
अर्धापुर तालुका में, विशेष रूप से लहान गांव में, बिजली गिरने से एक किसान की गाय की मौत हो गई. इस बीच, नांदेड़, भोकर, अर्धापुर, उमरी और धर्माबाद जैसे तहसीलों में भी इस बेमौसम मौसम से भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान हताश हो गए हैं. किसान अब नुकसान का तत्काल आकलन सर्वेक्षण (पंचनामा) कराने और आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं. इस प्राकृतिक आपदा ने किसान समुदाय को भारी नुकसान पहुंचाया है, और वे सरकार से तत्काल राहत देने का आग्रह कर रहे हैं. इस बीच, नांदेड़ जिले के लिए मौसम विभाग का येलो अलर्ट गुरुवार तक प्रभावी रहेगा.(प्रवीण कुमार, देशराज सिंह, कुअरचंद मांडले, सुरिंदर गोयल, धनंजय साबले, राकेश गुर्जर और उमेश रेवलिया का इनपुट)