सूकर पालन से चमकी किस्मत: 6 महीने में दोगुनी कमाई, 5 साल में खड़ा किया बड़ा कारोबार

सूकर पालन से चमकी किस्मत: 6 महीने में दोगुनी कमाई, 5 साल में खड़ा किया बड़ा कारोबार

कानपुर देहात के रामशरण वर्मा की किस्मत सुकर पालन से बदल चुकी हैं. कम लागत में बड़ा मुनाफा देने वाला यह बिजनेस अब तेजी से किसानों की आय को दोगुना करने का साधन बन रहा है. आइए जानते हैं इनकी सफलता की कहानी.

धर्मेंद्र सिंह
  • Kanpur dehat ,
  • Mar 24, 2026,
  • Updated Mar 24, 2026, 12:02 PM IST

सुकर पालन का बिजनेस इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है. दिन प्रतिदिन मांस के निर्यात में भी बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए इस बिजनेस में कम समय में ज्यादा फायदा मिल रहा है. इसी को देखतो हुए कानपुर देहात के डेरापुर निवासी किसान राम सरण वर्मा ने करीब 5 साल पहले सूकर पालन की शुरुआत की थी. शुरुआत में उन्हें इस व्यवसाय से ज्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके लिए कमाई का मजबूत जरिया बन गया. आज उनकी आय पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ चुकी है. 

हरियाणा से लाई गई उन्नत नस्ल बनी सफलता की कुंजी

राम सरण वर्मा ने हरियाणा से व्हाइट लार्ज वैरायटी के 18 फीमेल और 2 मेल सूकर खरीदकर पालन शुरू किया. यह नस्ल तेजी से बढ़ने और कम समय में ज्यादा वजन देने के लिए जानी जाती है, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है. उन्होंने बताया कि जब वह हरियाणा से लाए थे तो इनका वजन 15 से 20 किलो तक था लेकिन 6 महीने में इनका वजन 90 किलो तक पहुंच गया.  

6 से 8 महीने में दोगुना से ज्यादा बढ़ा वजन

उन्होंने बताया कि शुरुआत में सूकरों का वजन करीब 20 किलो था, जो महज 6 से 8 महीनों में बढ़कर 90 किलो तक पहुंच गया. वहीं, एक साल में इस नस्ल का वजन करीब 3.5 क्विंटल तक हो सकता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है. 

कम खर्च में आसान पालन, रोजाना सीमित चारा

सूकर पालन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. एक सूकर प्रतिदिन करीब 1.5 से 2 किलो तक ही चारा खाता है, जिससे इसका पालन खर्च काफी कम रहता है. यही कारण है कि छोटे और मध्यम किसान भी इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते हैं. 

5 साल में 20 से बढ़कर 300 तक पहुंची संख्या

राम सरण वर्मा के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत में केवल 20 सूकरों से काम शुरू किया था, जिसमें एक लाख से भी कम पूंजी लगी थी. बेहतर प्रबंधन और बढ़ती मांग के चलते आज उनकी संख्या बढ़कर करीब 300 तक पहुंच गई है, जो इस व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है. ज्यादातर सूकर पालन मांस के लिए किया जाता है. वही इन दिनों ब्रीडिंग करके बच्चे भी बेचे जा रहे हैं. छोटे सूकर 200 रुपये प्रति किलो तक बिकते हैं, जबकि बड़े सूकर 150 रुपये प्रति किलो तक आसानी से बिक जाते हैं. इस तरह किसान कम समय में अच्छा लाभ कमा सकते हैं. 

विशेषज्ञ की सलाह- प्रोटीन और मिनरल है जरूरी

पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. हर्ष गौतम के अनुसार, सूकर पालन के लिए बहुत महंगे या विशेष आहार की जरूरत नहीं होती. उन्हें प्रोटीन युक्त मक्का और मिनरल मिक्सचर देना चाहिए, जिससे उनका वजन तेजी से बढ़ता है. 

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