UP के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अमेरिका में छोड़ी नौकरी, देसी गाय के सहारे खड़ा किया 10 करोड़ का कारोबार, पढ़ें Success Story

UP के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अमेरिका में छोड़ी नौकरी, देसी गाय के सहारे खड़ा किया 10 करोड़ का कारोबार, पढ़ें Success Story

SUCCESS STORY: पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रावत बताते हैं कि इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी माना गया है. उन्हें छोड़ा नहीं जाता, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है. हेता के उत्पाद आज भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुंच रहे हैं.

up software engineer quit job in united states and build 10 crore rupees yearly business by indigenous cows गाजियाबाद के सिकंदरपुर के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावतup software engineer quit job in united states and build 10 crore rupees yearly business by indigenous cows गाजियाबाद के सिकंदरपुर के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावत
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • May 25, 2026,
  • Updated May 25, 2026, 10:05 AM IST

उत्तर प्रदेश में ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब जमीन से उठकर ग्लोबल मंच पर अपनी ताकत दिखा रहा है. इसी क्रम में गाजियाबाद के सिकंदरपुर के रहने वाले असीम रावत ने देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की बिक्री से चर्चा का केंद्र बन गए है. यह मॉडल सिर्फ गोसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सशक्त आर्थिक ताकत में बदल दिया गया है. रावत ने ‘हेता’ (HETHA) के जरिए 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है, जिसने देशी नस्लों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा लिख दी है. इससे पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं.

14 साल तक अमेरिका समेत इन देशी में की नौकरी

गाजियाबाद के सिकंदरपुर के रहने वाले असीम रावत ने इस अभियान की शुरुआत की. असीम 14 साल तक लगातार अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे. फिर इन्होंने गो संरक्षण की राह चुनी. आज 100 लोगों की एक स्पेशल टीम के साथ वे इस मिशन को न सिर्फ चला रहे हैं, बल्कि इसे ग्लोबल ब्रांड बना दिया है.

असीम रावत ने बताया कि हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर आधारित है. यहां दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं.

अमेरिका से दुबई तक यूपी की पहचान

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रावत बताते हैं कि इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी माना गया है. उन्हें छोड़ा नहीं जाता, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है. हेता के उत्पाद आज भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुंच रहे हैं, जिससे यूपी की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है.

डेयरी मास्टर प्लान के तहत लाखों रुपये अनुदान

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन भी दे रही है. ‘ऑपरेशन-4’ के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है.उन्होंने बताया कि डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक पशु पालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है. योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू किया गया है. 

‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश में एक बड़ा कदम

मुकेश मेश्राम ने बताया कि साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर सरकार का विशेष फोकस है. प्रदेश में लागू चार बड़ी योजनाएं मिलकर डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार दे रही हैं. इसका नतीजा यह है कि अब किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल देखने को मिल रहा है. उन्होंने बताया कि यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम बन चुका है.

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