तालाब में मुर्गी पालन... लाखों में कमाई कर रही UP की महिला किसान मंजू, सीक्रेट को जानकर दंग रह जाएंगे!

तालाब में मुर्गी पालन... लाखों में कमाई कर रही UP की महिला किसान मंजू, सीक्रेट को जानकर दंग रह जाएंगे!

Poultry Farming Story: मंजू कश्यप बताती हैं कि मछली पालन के साथ अब देसी मुर्गी का एक छोटा सा पोल्ट्री फॉर्म दुहाई गांव में 8 महीने पहले स्थापित किया था. महज 850 देसी चूजों से शुरू हुआ उनका छोटा-सा व्यवसाय आज एक बड़े फार्म की शक्ल ले रहा है, आज वे देसी मुर्गी के अंडे की सप्लाई लोकल मार्केट में कर रही हैं

मंजू कश्यप ने खुद बनाया बिजनेस का खास मॉडलमंजू कश्यप ने खुद बनाया बिजनेस का खास मॉडल
नवीन लाल सूरी
  • LUCKNOW,
  • Mar 16, 2026,
  • Updated Mar 16, 2026, 8:04 AM IST

आज हम उत्तर प्रदेश की एक महिला किसान के बारे में बताते हैं, जिसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद बागवानी के साथ पशुपालन करने फैसला लिया. उन्होंने 'integrated farming model' तैयार किया, जिससे आय के कई स्रोत बन गए. गाजियाबाद जिले के दुहाई इंडस्ट्रियल एरिया में मंजू कश्यप तालाब में मचान बनाकर मुर्गी पालन कर रही हैं. मंजू आज मुर्गी पालन के साथ मछली पालन, सिंघाड़ा, फलों और सब्जियों की खेती भी करती है, जिससे सालाना आय लाखों में हो रही है. 

तालाब के ऊपर ही स्ट्रक्चर बनाकर मुर्गी फार्म

इंडिया टुडे के किसान तक से बातचीत में मंजू ने बताया कि कम जमीन वाले मत्स्य पालक अगर एकीकृत खेती करना चाहते हैं, तो मल्टीलेयर फार्मिंग कर सकते हैं. उन्होंने किसानों को सुझाव देते हुए बताया कि तालाब के ऊपर ही स्ट्रक्चर बनाकर मुर्गी फार्म, बत्तख फार्म, बकरी फार्म या फिर बेलदार फसल भी उग सकते हैं और अधिक उत्पादन प्राप्त करके आए बढ़ा सकते हैं. दरअसल, कुछ किसानों के पास जमीन कम होती है, ऐसे में मल्टीलेयर फार्मिंग उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है. 

8 महीने पहले स्थापित किया पोल्ट्री फॉर्म

मंजू कश्यप बताती हैं कि मछली पालन के साथ अब देसी मुर्गी का एक छोटा सा पोल्ट्री फॉर्म दुहाई गांव में 8 महीने पहले स्थापित किया था. महज 850 देसी चूजों से शुरू हुआ उनका छोटा-सा व्यवसाय आज एक बड़े फार्म की शक्ल ले रहा है, आज वे देसी मुर्गी के अंडे की सप्लाई लोकल मार्केट में कर रही हैं. वहीं योगी सरकार के द्वारा मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, जिससे हमारा कारोबार तेजी से बढ़ रही है. 

एकीकृत खेती मॉडल को अपनाकर शुरू किया poultry farming

उन्होंने बताया कि मछली के तालाब के ऊपर एक मचान बनाया है, जहां 100 देसी मुर्गी को रखा गया है. आज एक देसी मुर्गी का अंडा 20-25 रुपये एक पीस बिक जाता है. वहीं एक कैरेट में 30 अंडे होते है. एक कैरेट की कीमत 450 रुपये में आसानी से बिक जाता है. वहीं एक दिन में 300-350 देसी मुर्गी के अंडे का उत्पादन हो रहा है. 

पीएम मोदी ने भी की सराहना

मंजू का कहना है कि सही जानकारी और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है. देसी मुर्गी के अंडे की कीमत इतनी अधिक होने का सबसे बड़ा कारण है, इसका औषधीय महत्व. ग्रामीण मान्यताओं और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह अंडा शरीर को ताकत देने वाला माना जाता है. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला किसान मंजू कश्यप की सराहना की थी.

ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल

मंजू की मेहनत, समझदारी और प्रबंधन कौशल के बल पर उनका कारोबार तेजी से बढ़ता जा रहा है. महिला किसान मंजू की यह सफलता इसलिए बहुत अहम है क्योंकि यह, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर महिलाएं और कृषि स्टार्टअप के लिए प्रेरणा है.

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