
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में में नेन्द्रन केले की कीमतों में अचानक गिरावट आने से केले के किसान परेशान हो गए हैं. किसानों का कहना है कि बाजार में दाम बहुत कम मिल रहे हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है. ऐसे में किसानों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और मदद देने की मांग की है. केला किसान राजेंद्रन ने बताया कि कई किसानों ने केले की खेती के लिए निजी बैंकों में अपने गहने और संपत्ति गिरवी रखकर कर्ज लिया था. उन्हें उम्मीद थी कि फसल बेचकर वे अपना कर्ज चुका देंगे. लेकिन अब कीमतें गिरने के कारण वे कर्ज का ब्याज भी नहीं चुका पा रहे हैं. किसानों को डर है कि वे अपने गिरवी रखे गहने शायद अगले साल ही छुड़ा पाएंगे.
राजेंद्रन ने सरकार से मांग की है कि कीमतों में गिरावट से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए. उनका सुझाव है कि सरकार किसानों से सीधे केले खरीदकर उन्हें पड़ोसी राज्यों में बेच सकती है. इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है और उनका नुकसान कम होगा.
एक अन्य किसान दामोदरन ने भी बताया कि मौजूदा बाजार भाव से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. उनका कहना है कि केले की बिक्री से मिलने वाली रकम खेती की लागत से भी कम है. किसानों के मुताबिक, केले की खेती में उर्वरक, कीटनाशक, सहारे के खंभे (पोल) और मजदूरी जैसे खर्च मिलाकर लगभग 2 लाख रुपये प्रति एकड़ तक लागत आती है. लेकिन अभी बाजार में केले के जो दाम मिल रहे हैं, उससे किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
वायलूर जैसे इलाकों में इस समय किसान अपनी फसल काटकर बाजार भेज रहे हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक दाम नहीं मिल रहे हैं. इससे केले के उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही कीमतों को स्थिर करने या मुआवजा देने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो कई किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है. (ANI)