
उत्तर प्रदेश के कृषि कारोबार को विदेशों तक विस्तार देने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है. केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित विश्व आलू कांग्रेस-2026 के दौरान भारत और केन्या के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को लेकर चर्चा हुई. बैठक में उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद अध्यक्ष एवं उद्यान तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा सहित भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान भारतीय कृषि कंपनियों को केन्या में जमीन लेकर उत्पादन करने के लिए आमंत्रित किया गया.
अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा ने बताया कि अब प्रदेश के कृषि उद्यमियों और कंपनियों के लिए अफ्रीकी देश केन्या में खेती करने का रास्ता खुल सकता है. इसके तहत भारतीय उद्यमियों को वहां जमीन लीज पर उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादों को वापस भारत भेजने का प्रस्ताव दिया गया है. इससे यूपी के किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
मीणा के मुताबिक, भारतीय उद्यमी केन्या में भूमि पट्टे पर लेकर खेती कर सकेंगे. वहां तैयार होने वाली उपज को भारत के बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, उनकी गुणवत्ता बढ़ाने और औद्योगिक निवेश को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ. यह पहल सफल होती है तो यूपी के कृषि कारोबार को देश की सीमाओं से बाहर विस्तार मिलने का रास्ता तैयार हो सकता है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश पहले से ही आलू उत्पादन के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां सालाना 250.66 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का करीब 34 प्रतिशत है. इसके अलावा राज्य में 620.7 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन और 2.06 करोड़ मीट्रिक टन की शीतगृह भंडारण क्षमता मौजूद है. यही आधार प्रदेश को कृषि व्यापार और खाद्य प्रसंस्करण के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है.
सम्मेलन में यूपी की आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान आधारित पहलों को भी प्रस्तुत किया गया. मेरठ सहित आसपास के क्षेत्रों में टिश्यू कल्चर और एरोपोनिक्स तकनीक से रोगमुक्त आलू बीज तैयार करने के प्रयासों को विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण माना. एरोपोनिक्स ऐसी तकनीक है, जिसमें मिट्टी के बजाय हवा के वातावरण में पौधों की जड़ें विकसित कर उत्पादन किया जाता है. वहीं, केन्या के साथ प्रस्तावित साझेदारी आगे बढ़ती है तो यूपी के कृषि उद्यमियों के लिए विदेश में निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच के नए अवसर बन सकते हैं.
प्रदेश सरकार का जोर अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात को भी बढ़ावा देने पर है. अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के सामने प्रदेश की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया. साथ ही डिजिटल पोर्टल और डीबीटी के माध्यम से कृषि आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की पहल की जानकारी भी साझा की गई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के एशिया निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह तथा भारत में CIP के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधियों की सहभागिता रही.
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