
केंद्र सरकार ने 'डिजिटल कृषि मिशन' और 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) फ्रेमवर्क के तहत देश भर में 11 करोड़ किसानों के लिए 11 अंकों वाले 'किसान पहचान पत्र' (Farmer ID) तैयार कर लिए हैं. यह ऐतिहासिक लक्ष्य मार्च 2027 की तय समय-सीमा से पूरे 5 महीने पहले ही हासिल कर लिया गया है.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक वीडियो संदेश के जरिए इस उपलब्धि की जानकारी दी. उन्होंने इसे 'विकसित भारत' और 'समृद्ध किसान' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम बताया है.
'किसान पहचान पत्र' का मुख्य उद्देश्य देश के हर किसान को एक विशिष्ट (यूनिक) डिजिटल पहचान देना है. इसके जरिए किसानों को PM-किसान, फसल बीमा, बैंक लोन (KCC) और आपदा राहत जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के सीधे मिलेगा.
फार्मर आईडी बनने से कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी. बार-बार जमीनी कागजात या दस्तावेज जमा करने और वेरिफिकेशन (Verification) कराने की झंझट खत्म हो जाएगी. वेरिफाइड डेटाबेस होने से सही किसान तक लाभ पहुंचेगा और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी.
इसके अलावा, किसान अपनी उपज को आसानी से और सही दाम पर बेच सकेंगे.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2024 तक केवल 30 लाख किसान पहचान पत्र बने थे, लेकिन इसके बाद अभियान में तेजी लाई गई और दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा 7.8 करोड़ पहुंच गया और अब यह 11 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है.
इस 'किसान रजिस्ट्री' में देश के छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी भागीदारी है. 81% किसान सीमांत और छोटे जोत (5 हेक्टेयर से कम जमीन वाले) वर्ग से हैं. 26% महिलाएं रजिस्टर्ड किसानों में शामिल हैं.
मंत्रालय ने बताया कि 2 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद शुरू हुआ 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगा है. अब तक देश भर के 6 करोड़ से अधिक किसानों को 'किसान ID' आधारित प्रणाली से सीधा लाभ पहुंचाया जा चुका है.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस शानदार सफलता के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों, कर्मचारियों और जिला प्रशासनों को बधाई दी और उनका धन्यवाद किया.