
तोतापुरी आम किसानों के लिए राहत की खबर है. दरअसल, केंद्र सरकार ने बाजार में कीमत गिरने से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बाजार हस्तक्षेप मूल्य योजना (Market Intervention Scheme) के तहत समर्थन मूल्य देने की घोषणा के बाद कर्नाटक में तोतापुरी आम उत्पादकों का रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है. इस योजना का मकसद किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाना है. कर्नाटक सरकार ने 27 जून से योजना के तहत किसानों का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है. फिलहाल कोलार, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु दक्षिण जिलों के तोतापुरी आम किसानों को इसमें शामिल किया जा रहा है. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही वे समर्थन मूल्य के तहत अपनी आम की फसल बेच सकेंगे.
बागवानी विभाग के अनुसार, तोतापुरी आम की खरीद के लिए 1,750 रुपये प्रति क्विंटल का बाजार हस्तक्षेप मूल्य (MIP) तय किया गया है. इस योजना के तहत सरकार करीब 1.30 लाख टन आम की खरीद का लक्ष्य लेकर चल रही है. अगर बाजार भाव और तय समर्थन मूल्य के बीच अंतर होता है, तो उस अंतर का 25 प्रतिशत हिस्सा किसानों को दिया जाएगा. इसके तहत किसानों को लगभग 4.37 रुपये प्रति किलोग्राम की सहायता राशि मिलने की उम्मीद है. हालांकि, यह लाभ अधिकतम 200 क्विंटल आम और प्रति किसान अधिकतम 5 एकड़ जमीन तक सीमित है.
बागवानी विभाग के निदेशक इब्राहिम मैगुर ने बताया कि किसान पहले योजना के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराएं और उसके बाद ही आम की बिक्री करें. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया चयनित तालुक और होबली केंद्रों पर शुरू की गई है. इस योजना को कर्नाटक राज्य आम विकास एवं विपणन निगम लिमिटेड के माध्यम से लागू किया जा रहा है. इसके लिए एनईएमएल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा. योजना आम उत्पादन के पहले लेनदेन की तारीख से एक महीने की अवधि तक लागू रहेगी.
किसानों को अपनी तोतापुरी आम की उपज कृषि उपज विपणन समिति (APMC) बाजारों और कृषि विपणन विभाग द्वारा चिन्हित आम प्रसंस्करण इकाइयों में बेचनी होगी. योजना की निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया जाएगा, जिसमें राजस्व, कृषि विपणन और बागवानी विभाग के अधिकारी शामिल होंगे.
तोतापुरी आम कर्नाटक की प्रमुख बागवानी फसलों में शामिल है. कई बार बाजार में कीमत गिरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में सरकार की यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने में मदद कर सकती है. इस पहल से खासकर कोलार और आसपास के जिलों के आम उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और आम उत्पादन से जुड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले.