
मध्य प्रदेश में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वन विभाग ने 'गुप्तचर ऐप' लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए अब वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीण सीधे वन विभाग से जुड़कर अवैध गतिविधियों की सूचना दे सकेंगे.ऐप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, जिससे लोग बिना किसी डर के वन अपराधों की जानकारी साझा कर सकेंगे.
वन विभाग का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करना है. विभाग का मानना है कि वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है, जब ग्रामीण भी वन संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदार बनें.
यह ऐप विशेष रूप से दक्षिण सिवनी वनमंडल के अंतर्गत वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए तैयार किया गया है. कोई भी नागरिक ऐप डाउनलोड कर स्वयं को 'गुप्तचर' के रूप में पंजीकृत कर सकता है. पंजीकरण प्रक्रिया बेहद आसान और यूजर-फ्रेंडली रखी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें.
पंजीकरण पूरा होने पर प्रत्येक उपयोगकर्ता को एक विशिष्ट गुप्तचर आईडी प्रदान की जाती है. इसी आईडी के माध्यम से उसकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाती है.
गुप्तचर ऐप में वन अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए सरल व्यवस्था की गई है. ऐप में उपलब्ध ड्रॉप-डाउन सूची के माध्यम से उपयोगकर्ता विभिन्न प्रकार के अपराधों की जानकारी दे सकते हैं. इनमें—
जैसी श्रेणियां शामिल हैं.सूचना मिलते ही वन विभाग संबंधित मामले में त्वरित कार्रवाई कर सकेगा.
ऐप में वन विभाग के अधिकारियों के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं.रेंज अधिकारी (आरओ) से लेकर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) तक के नंबर इसमें दिए गए हैं. आवश्यकता पड़ने पर उपयोगकर्ता सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क कर वन अपराधों की जानकारी साझा कर सकते हैं.
गुप्तचर ऐप की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वन विभाग के अधिकारी परिक्षेत्र और बीटवार पंजीकृत गुप्तचरों से उनके पंजीकृत मोबाइल नंबरों के माध्यम से सीधे संवाद कर सकेंगे. इससे वन सुरक्षा, संरक्षण और जागरूकता से जुड़े विषयों पर नियमित चर्चा होगी और स्थानीय समुदाय तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.
वन विभाग का कहना है कि गुप्तचर ऐप केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि जन-सहभागिता आधारित वन संरक्षण मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.इससे वन अपराधों की निगरानी मजबूत होगी, कार्रवाई में तेजी आएगी और जंगलों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में स्थानीय लोगों की भूमिका और अधिक प्रभावी बनेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो यह वन अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ लोगों में वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता भी बढ़ाएगा. यह पहल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और टिकाऊ वन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.