सरकार का दावा: MSP ही नहीं, किसानों की उपज खरीदी के लिए कई योजनाएं, 12 साल में दोगुनी हुई खरीद

सरकार का दावा: MSP ही नहीं, किसानों की उपज खरीदी के लिए कई योजनाएं, 12 साल में दोगुनी हुई खरीद

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि किसानों की उपज खरीद के लिए एमएसपी के अलावा पीएम-आशा, बाजार हस्तक्षेप योजना और भावांतर भुगतान योजना जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं. 22 एमएसपी फसलों की सरकारी खरीद 2004-14 के 6,987 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2014-26 में 12,819 लाख मीट्रिक टन हो गई, जबकि किसानों को भुगतान 27.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

कई फसलों के दाम MSP से नीचे कई फसलों के दाम MSP से नीचे
क‍िसान तक
  • Aug 06, 2026,
  • Updated Aug 06, 2026, 5:05 PM IST

केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों की उपज खरीद केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अलावा भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम मिल सके. सरकार ने संसद में बताया कि पीएम-आशा योजना के तहत मूल्य समर्थन योजना (PSS), बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) और भावांतर भुगतान योजना (PDP) जैसे प्रावधानों के जरिये किसानों को राहत दी जा रही है.

सरकार के मुताबिक, हर साल कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CPAC) की सिफारिशों और राज्यों के सुझावों के आधार पर 22 अधिसूचित फसलों का एमएसपी तय किया जाता है. साल 2018-19 से सरकार सभी खरीफ, रबी और अन्य कमर्शियल फसलों के एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना स्तर पर निर्धारित कर रही है. सरकार ने बताया, 22 MSP फसलों की कुल खरीद 2004-14 के 6,987 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2014-26 (जून 2026 तक) में 12,819 लाख मीट्रिक टन हो गई है, जबकि किसानों को MSP के तहत भुगतान 7.41 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.

किसानों को मूल्य समर्थन योजना का लाभ

सरकार ने बताया कि जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे चला जाता है, तब किसानों को मूल्य समर्थन देने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से खरीद की जाती है. अन्न और मोटे अनाज की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियां करती हैं. वहीं दलहन, तिलहन और कोपरा की खरीद पीएम-आशा योजना के तहत मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के जरिए की जाती है. कपास की खरीद भारतीय कपास निगम (CCI) और जूट की खरीद भारतीय पटसन निगम (JCI) द्वारा एमएसपी पर की जाती है.

कृषि एवं बागवानी की जल्द खराब होने वाली फसलों के लिए पीएम-आशा के तहत बाजार हस्तक्षेप योजना लागू है. इसका मकसद किसानों को बंपर उत्पादन के समय कम कीमतों पर मजबूरी में उपज बेचने से बचाना है. साल 2024-25 से इस योजना में भावांतर भुगतान (PDP) का नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत किसानों को बाजार हस्तक्षेप मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सीधे भुगतान किया जाता है. राज्यों को फसल की सीधी खरीद या सीधे अंतर राशि देने का विकल्प दिया गया है.

इसके अलावा, टमाटर, प्याज और आलू (TOP) फसलों के लिए स्टोरेज और ढुलाई लागत को बाद में रिम्बर्स करने का प्रावधान भी शुरू किया गया है, जिससे उत्पादक राज्यों से उपभोक्ता राज्यों तक फसल पहुंचाने में मदद मिलेगी.

किसानों से 5,781 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद

सरकार के अनुसार, बढ़े हुए एमएसपी और खरीद व्यवस्था में सुधार का लाभ किसानों को मिला है. साल 2021-22 से जून 2026 तक किसानों से 5,781 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद की गई, जिसके बदले 14.58 लाख करोड़ रुपये का एमएसपी भुगतान किया गया.

सरकार ने यह भी बताया कि सभी 22 एमएसपी फसलों की कुल खरीद साल 2004-14 के दौरान 6,987 लाख मीट्रिक टन थी, जो साल 2014-26 (जून 2026 तक) में बढ़कर 12,819 लाख मीट्रिक टन हो गई. इसी अवधि में किसानों को एमएसपी के तहत भुगतान 7.41 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया.

केंद्र का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए लोन, बीमा, आय सहायता, सिंचाई, मार्केटिंग, डिजिटल कृषि और खरीद व्यवस्था समेत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं.

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