
छोटे और सीमांत किसानों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) ने 12 सितंबर 2026 को अपने सात साल पूरे कर लिए हैं. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक देशभर के 24,96,252 किसान रजिस्टर हो चुके हैं. यह योजना उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत खेती है और जिनके पास वृद्धावस्था के लिए पर्याप्त बचत नहीं होती.
केंद्र सरकार की इस योजना के तहत पात्र किसानों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने न्यूनतम 3,000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन दी जाती है. योजना की खास बात यह है कि इसमें किसान जितना अंशदान जमा करता है, उतना ही योगदान केंद्र सरकार भी देती है. इस तरह किसानों के लिए एक पेंशन फंड तैयार किया जाता है.
योजना के लाभार्थियों के आंकड़े बताते हैं कि किसानों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है. नामांकन के मामले में हरियाणा देश में सबसे आगे है, जहां करीब 5.75 लाख किसान इस योजना से जुड़े हैं. इसके बाद बिहार में 3.46 लाख से अधिक किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.
वहीं झारखंड और उत्तर प्रदेश में 2.5 लाख से अधिक किसान योजना का हिस्सा बन चुके हैं. छत्तीसगढ़ में 2 लाख से ज्यादा किसानों ने नामांकन कराया है. इसके अलावा ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में किसान इस योजना से जुड़े हैं.
फरवरी 2026 तक योजना के संचालन और विस्तार पर 540.66 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. बढ़ते नामांकन से यह भी स्पष्ट होता है कि किसानों के बीच वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है.
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित एक केंद्रीय क्षेत्र की पेंशन योजना है. इसका संचालन भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के सहयोग से किया जाता है.
योजना पूरी तरह स्वैच्छिक और अंशदायी है. इसमें शामिल होने वाले किसान 60 वर्ष की आयु तक नियमित मासिक अंशदान जमा करते हैं. इसके बदले केंद्र सरकार समान राशि का योगदान देती है.
योजना में योगदान राशि किसान की उम्र के अनुसार तय की गई है.
18 वर्ष की आयु में जुड़ने पर किसान को 55 रुपये प्रतिमाह जमा करने होते हैं.
20 वर्ष की आयु पर 61 रुपये प्रतिमाह.
25 वर्ष की आयु पर 80 रुपये प्रतिमाह.
30 वर्ष की आयु पर 105 रुपये प्रतिमाह.
35 वर्ष की आयु पर 150 रुपये प्रतिमाह.
40 वर्ष की आयु पर 200 रुपये प्रतिमाह.
किसान जितनी राशि जमा करता है, उतनी ही राशि सरकार भी उसके खाते में जमा करती है. अंशदान सीधे किसान के बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के माध्यम से कटता है.
योजना का लाभ केवल किसान तक सीमित नहीं है. यदि पेंशन प्राप्त कर रहे किसान की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को परिवार पेंशन के रूप में पेंशन राशि का 50 प्रतिशत, यानी 1,500 रुपये प्रति माह दिया जाता है.
यदि किसान की मृत्यु 60 वर्ष की आयु से पहले हो जाती है, तो उसकी पत्नी या पति योजना को आगे जारी रख सकता है और निर्धारित अंशदान जमा कर पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकता है. दूसरी स्थिति में वह योजना से बाहर निकलने का विकल्प भी चुन सकता है.
यह योजना देश के उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए है, जिनके पास अधिकतम दो हेक्टेयर तक कृषि योग्य भूमि है.
योजना में शामिल होने के लिए किसान की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए. इसके अलावा किसान का नाम संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भूमि रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी है.
कुछ श्रेणियों के किसानों को इस योजना से बाहर रखा गया है. इनमें शामिल हैं:
हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS), चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है.
योजना में शामिल होने के लिए किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है.
CSC पर किसान का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाता है और ऑटो-डेबिट की मंजूरी लेने के बाद पहली किस्त जमा हो जाती है. इसके बाद किसान को पेंशन अकाउंट नंबर (PAN) और पेंशन कार्ड जारी किया जाता है. सभी रिकॉर्ड LIC को भेजे जाते हैं, जो पेंशन फंड और भुगतान का प्रबंधन करता है.
किसान अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, त्रैमासिक, चार-मासिक या अर्धवार्षिक आधार पर भी अंशदान जमा कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का सात साल का सफर यह दिखाता है कि खेती करने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है. मौसम, बाजार और उत्पादन जोखिमों के बीच खेती करने वाले किसानों के लिए वृद्धावस्था में सुनिश्चित आय का साधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
करीब 25 लाख किसानों के जुड़ने के साथ यह योजना देशभर में किसानों के लिए एक मजबूत पेंशन नेटवर्क के रूप में विकसित हुई है. सरकार का मानना है कि यह पहल किसानों को उनके जीवन के अंतिम वर्षों में आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.