
उत्तर प्रदेश में कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए योगी सरकार डिजिटल तकनीक का तेजी से उपयोग कर रही है. जिससे किसानों की फसलों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने, उत्पादन का समय पर आकलन करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का दायरा मौजूदा खरीफ सीजन में बढ़ाया जा रहा है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए.
मुख्य सचिव गोयल ने बताया कि खरीफ-2026 ई-खसरा पड़ताल (डिजिटल क्रॉप सर्वे) का अभियान 16 अगस्त, 2026 से शुरु होगा. इसके सफल संचालन के लिए सभी जिलाधिकारियों को पूर्व तैयारियां समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए. उन्होंने कहा कि आवश्यक संख्या में सर्वेयरों का चयन एवं ऑनबोर्डिंग तथा सभी सर्वेयरों का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए. साथ ही, सर्वे प्रारंभ होने से पहले सभी सर्वेयरों को शत-प्रतिशत कार्य आवंटित कर दिया जाए.
वहीं, फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग कर फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण की गति को और तेज किया जाए तथा शत-प्रतिशत किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाए. उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कार्य की प्रगति धीमी है, वहां विशेष प्रयास किए जाएं, ताकि भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध एवं शत-प्रतिशत प्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है.
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के तहत प्रदेश में 85 प्रतिशत (2,45,94,831) किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जिससे उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 10वें स्थान पर पहुंच गया है. गाजियाबाद और रामपुर ने भारत सरकार के लक्ष्य के अनुसार 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण कर ली है. वहीं, प्रदेश में गाटों के अंश निर्धारण का कार्य 88.92 प्रतिशत पूरा हो चुका है. अमरोहा, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, महोबा, बहराइच, हमीरपुर, मुरादाबाद तथा ललितपुर ने 99 प्रतिशत अंश निर्धारण कार्य पूर्ण कर प्रदेश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है.
नंद बाबा दुग्ध मिशन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाए रखने के लिए प्रत्येक जनपद में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए.उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन को लक्ष्य बनाकर कार्य किया जाए तथा दुग्ध उत्पादकों को गांव स्तर पर ही उनके दूध के उचित मूल्य पर दूध विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. गोयल ने अधिकारियों से कहा कि मिशन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाए तथा जनपदों को आवंटित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाए.
आगामी अगस्त माह में प्रत्येक जनपद में दुग्ध कॉन्क्लेव आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बैंक अधिकारियों की सहभागिता रहेगी. इन कार्यक्रमों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा.
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