
दिल्ली में पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेन्द्र लाठर ने धान की खरीद के दौरान किसानों से कथित लूट का मुद्दा उठाते हुए हरियाणा सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि धान में निर्धारित सीमा से अधिक नमी का हवाला देकर किसानों को समर्थन मूल्य से कम भुगतान किया जाता है, जबकि सुखाने के बाद वजन में होने वाली वास्तविक कमी इससे काफी कम हो सकती है. डॉ. लाठर ने इस संबंध में राज्य के कृषि मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव और हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड को पत्र भेजकर मंडियों में किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग की है.
डॉ. लाठर ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि धान में 17 फीसदी से अधिक नमी होने पर व्यापारी समर्थन मूल्य से करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम देते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 19 फीसदी नमी वाले धान को सुखाने के बाद वजन में कमी लगभग दो किलोग्राम प्रति क्विंटल रह जाती है. इसकी कीमत करीब 50 रुपये बैठती है.
उन्होंने सवाल उठाया कि वास्तविक वजन में कमी और किसानों से कथित तौर पर की जाने वाली कटौती के बीच इतना अंतर क्यों है. उन्होंने सरकार से धान खरीद में नमी के आधार पर होने वाली कटौती की प्रक्रिया की जांच करने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की मांग की है.
डॉ. लाठर ने 11 सितंबर 2026 को मार्केट कमेटी शाहजादपुर, जिला अंबाला की ओर से जारी एक कार्यालय आदेश पर भी सवाल उठाए हैं. आदेश में मंडी के आढ़तियों और खरीद केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि सरकारी खरीद शुरू होने तक अपनी फर्म पर जीरी यानी धान की झराई, तुलाई और भराई का काम नहीं किया जाए.
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी खरीद शुरू होने से पहले यदि कोई आढ़ती यह कार्य करता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. इसकी जिम्मेदारी संबंधित आढ़ती की होगी. डॉ. लाठर ने इस आदेश को किसानों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला बताते हुए इसकी वैधता पर सवाल उठाया है.
डॉ. लाठर का कहना है कि अगर शाहजादपुर मंडी का यह आदेश व्यापक रूप से लागू किया जाता है तो सरकारी खरीद शुरू होने तक किसानों की धान उपज की मार्केटिंग प्रभावित हो सकती है. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आदेश को गैरकानूनी बताते हुए हरियाणा सरकार से तत्काल रोक लगाने की मांग की है. डॉ. लाठर ने बताया कि उन्होंने 12 सितंबर को ई-मेल के माध्यम से राज्य सरकार को पत्र भेजा है. इसमें शाहजादपुर मंडी के सचिव एवं कार्यकारी अधिकारी द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाने और मामले में उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है.
पूर्व कृषि वैज्ञानिक ने सरकारी खरीद के दौरान आढ़तियों द्वारा किसानों से कथित तौर पर वसूले जाने वाले आकस्मिक शुल्क यानी इन्सिडेंटल चार्जेज का मुद्दा भी उठाया है. उन्होंने हरियाणा सरकार से ऐसी वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि किसानों को सरकारी खरीद में देय शुल्क और संबंधित जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि धान बेचते समय उन्हें अनावश्यक कटौती का सामना न करना पड़े.
डॉ. लाठर ने राज्य सरकार से आकस्मिक शुल्क से संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं को अंग्रेजी के बजाय किसानों के लिए सरल हिंदी में जारी करने का आग्रह किया है. उन्होंने मांग की है कि आढ़तियों को इन शुल्क संबंधी निर्देशों की प्रतियां अपनी फर्म या दुकानों पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं. उनका कहना है कि इससे किसान अपनी उपज की बिक्री के समय लागू शुल्क और संभावित कटौती की जानकारी रख सकेंगे. साथ ही, किसी भी अनुचित वसूली की स्थिति में संबंधित विभाग के सामने शिकायत उठा सकेंगे.