
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से संचालित ‘किसान तक’ का किसान कारवां आज हमीरपुर जनपद के इकठौर गांव पहुंचा. 75 जिलों की व्यापक कवरेज के तहत यह किसान कारवां का 18वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना रहा. कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों और पशुपालन विशेषज्ञों ने किसानों को खेती की नई तकनीकों, मिट्टी की सेहत, बीज चयन, कीटनाशक प्रबंधन और पशुपालन से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं. बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं.
किसान कारवां के पहले चरण में ब्रह्मानंद कृषि महाविद्यालय के पीएचडी छात्र अभिषेक पाठक ने बताया कि आज देखा-देखी की खेती के कारण मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है. उन्होंने किसानों को 5×6 फीट का गड्ढा बनाकर पशुओं के गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार करने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि कंपोस्ट के उपयोग से मिट्टी की उर्वरक शक्ति और ऑर्गेनिक मैटर बढ़ेगा, जिससे फसल उत्पादन में भी वृद्धि होगी. इसी क्रम में महाविद्यालय के एमएससी छात्र राम राजा ने बताया कि खेती में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा भी जरूरी है.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर की महिला वैज्ञानिक डॉ. शालिनी ने बताया कि जिले के किसान मेहनती हैं, लेकिन खेती में कुछ बदलाव जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि खरीफ में बारिश के कारण फसलें प्रभावित होती हैं, ऐसे में जायद सीजन में मक्का ‘सम्राट’ वैरायटी और उन्नत सब्जी बीजों का उपयोग कर किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं.
तीसरे चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. पी. डी. राजपूत ने बकरी पालन, भेड़ पालन और गाय पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं और अनुदान की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि हर पशुपालक को पशुओं को 6 माह के भीतर एडवेंडाजोल दवा जरूर देनी चाहिए, जिससे पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध उत्पादन बना रहेगा.
तीसरे चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. पी. डी. राजपूत ने बकरी पालन, भेड़ पालन और गाय पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं और अनुदान की जानकारी दी.
किसान कारवां के चौथे चरण में हमीरपुर जिले के डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि कैसे किसान फार्म रजिस्ट्री से बड़े फायदे ले सकते हैं. अब हर किसान के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है.
उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री कराने से किसानों को केसीसी, सम्मान निधि, भूमि डिजिटलाइजेशन, अनुदान और उर्वरक सब्सिडी जैसे एक नहीं बल्कि 6 बड़े फायदे मिलते हैं. इसलिए हर किसान को फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी है.
पांचवें चरण में कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रेशु कुमार गौतम ने बताया कि किसान अक्सर बीमारी लगने के बाद बिना सलाह के अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, जिससे फसल और मानव स्वास्थ्य दोनों को नुकसान होता है.
उन्होंने मित्र कीट और शत्रु कीट की पहचान, सूर्य की रोशनी के फायदे और 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कृषि रक्षा दवाओं की जानकारी दी.
छठवें चरण में जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर ने बताया कि जिले में 14 हजार सॉइल हेल्थ कार्ड का लक्ष्य तय किया गया है. उन्होंने कहा कि मिट्टी में मौजूद 17 आवश्यक तत्वों की समय-समय पर जांच जरूरी है. जैसे इंसान अपने स्वास्थ्य की जांच करता है, वैसे ही मिट्टी की जांच से बेहतर उत्पादन संभव है.
सातवें चरण में जादूगर सलमान ने रोचक अंदाज में बताया कि देखा-देखी की खेती से किसानों को नुकसान होता है, जबकि सही सलाह और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने वाले किसान खुशहाल बनते हैं.
कार्यक्रम के आठवें चरण में लकी ड्रा का आयोजन किया गया, जिसमें 10 किसानों को ₹500-₹500 के पुरस्कार दिए गए. पहला पुरस्कार अनुसूया देवी ने ₹3000 जीते, जबकि द्वितीय पुरस्कार सरिता देवी ने ₹2000 की राशि प्राप्त की.
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