
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026-27 का बजट पेश कर दिया है. सरकार ने इस बजट में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए आवंटित होने वाली रकम पर कैंची चला दी है. साल 2026-27 में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है, जो 2025-26 में 1,71,437 करोड़ रुपये था. ऐसे में इस साल के बजट को कृषि से जुड़े क्षेत्र और किसानों के लिए कटौती वाला माना जा रहा है. सीतारमण ने बजट 2026 पेश करते हुए खेती और किसानों को मजबूत बनाने की बात तो दोहराई, लेकिन रकम में कटौती ने किसानों को निराश किया.
हालांकि, साल 2026 के बजट में ग्रामीण विकास पर फोकस किया गया है. गांवों के विकास पर पिछले साल से अधिक रकम का आवंटन किया गया है. साल 2026-27 में ग्रामीण विकास पर 2,73,108 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है, जो 2025-26 में 2,66,817 करोड़ रुपये था.
किसानों की आय बढ़ाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. मोदी सरकार ने ही पहली बार यह टारगेट रखा कि 2022 तक किसानों की आय डबल की जाएगी. साल 2022 बीत चुका है लेकिन इनकम डबल होने वाली कोई रिपोर्ट नहीं आई है. किसानों का कहना है कि उनकी आय दोगुनी तब होगी जब फसलों का दाम सही बढ़ेगा. फसलों के सही दाम मिलने को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है. संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े नेता मनोज जागलान का कहना है कि एमएसपी गारंटी देने और पीएम किसान निधि योजना की रकम डबल होने की उम्मीद थी, लेकिन दोनों पर सरकार बजट में मौन रही है. सवाल यह है कि फसलों की सही कीमत ही नहीं मिलेगी तो किसानों की इनकम डबल होने का सपना कैसे साकार होगा?
किसानों की आय बढ़ाना: उत्पादकता बढ़ाने और उद्यमिता के जरिए किसानों की कमाई बढ़ाने पर फोकस, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष जोर दिया गया है.
मत्स्य पालन विकास: 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, और स्टार्ट-अप, महिला-नेतृत्व वाले समूहों और मछली किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को शामिल करते हुए बाजार से संपर्क बढ़ाना.
पशुपालन और पशुधन: क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता के लिए समर्थन, पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण और विस्तार, एकीकृत डेयरी, मुर्गी पालन और पशुधन मूल्य श्रृंखला का निर्माण, और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना.
उच्च मूल्य वाली फसलें और विविधीकरण: खेती की पैदावार में विविधता लाने और आय बढ़ाने के लिए नारियल, काजू, कोको, चंदन, अगर के पेड़ और मेवे (बादाम, अखरोट, पाइन नट्स) जैसी फसलों के लिए समर्थन.
क्षेत्र-विशिष्ट कार्यक्रम: पहलों में एक नारियल संवर्धन योजना, 2030 तक निर्यात और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित काजू और कोको कार्यक्रम, और राज्य भागीदारी के साथ एक चंदन इकोसिस्टम तंत्र को बढ़ावा देना शामिल है.
बागों का कायाकल्प और युवा जुड़ाव: पुराने बागों का कायाकल्प और वैल्यू एडिशन और युवाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए हाई डेंसिटी वाली खेती का विस्तार.
टेक्नोलॉजी और सहकारी समितियां: उत्पादकता में सुधार के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल और ICAR के कार्यक्रमों को एकीकृत करने वाले मल्टीलिंगुअल AI सलाहकार उपकरण 'भारत-विस्तार' का शुभारंभ. साथ ही संघीय सहकारी समितियों या सरकारी संस्थाओं को इनपुट की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए टैक्स में लाभ.