
बिहार सरकार किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के जरिए आसानी से लोन दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है. अब किसानों को बैंक से लोन लेने में ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए सरकार ने नई तैयारी शुरू की है. सोमवार को हुई राज्य स्तरीय बैंकिंग समीक्षा बैठक में बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने सभी बैंकों को निर्देश दिया कि किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जाए.
सरकार चाहती है कि किसानों को समय पर खेती के लिए पैसे मिल सकें, ताकि उन्हें खेती के दौरान किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
विकास आयुक्त ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर 19 मई से “सहयोग शिविर” शुरू किए जा रहे हैं. ये शिविर हर 15 दिन में लगाए जाएंगे. इन शिविरों में गांव के लोगों की अलग-अलग समस्याओं के साथ किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा.
अगर किसी किसान का KCC आवेदन अटका हुआ है, कार्ड का नवीनीकरण नहीं हो रहा है या बैंक से जुड़ी कोई दूसरी परेशानी है, तो उसका समाधान शिविर में किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बैंक के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और काम जल्दी होगा.
बैठक में विकास आयुक्त ने कहा कि राज्य में खेती, छोटे उद्योग, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप से जुड़े क्षेत्रों में लगातार लोन दिए जा रहे हैं. इससे बिहार की आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर लोन देना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है. किसान अगर सही समय पर पैसा पा जाएंगे तो खेती का काम भी बेहतर तरीके से कर सकेंगे.
बैठक में एक बड़ा फैसला भी लिया गया. अब किसान क्रेडिट कार्ड योजना को “जन समर्थ पोर्टल” से जोड़ा जाएगा. इसका मतलब है कि किसान डिजिटल तरीके से भी आसानी से लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे.
इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज होगी. किसानों को बार-बार बैंक जाने की जरूरत कम पड़ेगी और लोन मिलने में आसानी होगी. सरकार का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से किसानों का समय भी बचेगा और परेशानियां भी कम होंगी.
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि बिहार ने पहली बार 60 प्रतिशत से ज्यादा सीडी रेशियो हासिल किया है. सीडी रेशियो का मतलब होता है कि बैंकों में जमा हुए पैसों के मुकाबले कितना पैसा लोगों को लोन के रूप में दिया गया.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का सीडी रेशियो 60.21 प्रतिशत पहुंच गया है. यह राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. साल 2018-19 में यह आंकड़ा सिर्फ 44.09 प्रतिशत था. यानी करीब सात सालों में इसमें 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
विकास आयुक्त ने बताया कि बिहार के बैंकों में कुल जमा राशि बढ़कर 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये हो गई है. वहीं लोन वितरण की राशि बढ़कर 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
पिछले साल की तुलना में जमा राशि में करीब 51 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं लोन वितरण में भी करीब 37 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है.
बैठक में कुछ बैंकों का प्रदर्शन काफी अच्छा बताया गया. स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का सीडी रेशियो सबसे ज्यादा 168.78 प्रतिशत रहा. इसके अलावा बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का प्रदर्शन भी बेहतर रहा.
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाएं और मजबूत की जाएंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को आसानी से लोन मिल सके और राज्य की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ सके.
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