
बिहार में अब उच्च गुणवत्ता वाला गुड़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. गन्ना अनुसंधान केंद्र, पूसा को गुड़ उत्पादन के क्षेत्र में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा. इसका मतलब है कि यहां गुड़ बनाने की सबसे अच्छी और नई तकनीकें सिखाई और तैयार की जाएंगी, ताकि बिहार का गुड़ देशभर में पहचान बना सके.
इस खास योजना के लिए केंद्र सरकार ने 5 करोड़ 69 लाख 65 हजार रुपये की राशि मंजूर की है. यह पैसा पांच साल के लिए दिया जाएगा. पहले ही साल के लिए 1 करोड़ 31 लाख 95 हजार रुपये जारी कर दिए गए हैं. इससे काम जल्दी शुरू हो सकेगा और शोध से जुड़े कार्य आगे बढ़ेंगे.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब बिहार में बनने वाला गुड़ प्रीमियम क्वालिटी का होगा. यानी यह ज्यादा साफ, स्वादिष्ट और अच्छी पैकिंग में मिलेगा. अभी कई बार गुड़ की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने से किसानों को सही दाम नहीं मिल पाता. नई तकनीक से यह समस्या दूर होगी.
गन्ना उद्योग मंत्री श्री संजय कुमार ने बताया कि बिहार को गुड़ उत्पादन में देश के अन्य बड़े राज्यों की तरह आगे लाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. इसी सोच के साथ गन्ना अनुसंधान केंद्र, पूसा को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का फैसला लिया गया. उन्होंने कहा कि इससे गन्ने की नई किस्मों, खेती के सही तरीकों और गुड़ की गुणवत्ता पर लगातार शोध किया जाएगा.
इस योजना के तहत आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक विकसित की जाएगी.
इसका मतलब है कि:
इस योजना के बारे में एसीएस श्री के. सेंथिल कुमार ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाएगा. इससे-
इस योजना से गन्ना किसानों, गुड़ उद्योग से जुड़े लोगों और उद्यमियों को बड़ा फायदा मिलेगा.
गुड़ की अच्छी कीमत मिलने से:
गन्ना अनुसंधान केंद्र, पूसा को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाना बिहार के लिए एक बहुत अच्छी शुरुआत है. इससे न सिर्फ गुड़ की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों की आमदनी और रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे. आने वाले समय में “बिहार का गुड़” देशभर में अपनी अलग पहचान बना सकता है.
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