Paddy Procurement: धान खरीदी का टोकन नहीं मिलने पर किसान ने उठाया खौफनाक कदम, मचा हड़कंप

Paddy Procurement: धान खरीदी का टोकन नहीं मिलने पर किसान ने उठाया खौफनाक कदम, मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. MSP पर धान बेचने के लिए जरूरी टोकन नहीं मिलने से परेशान किसान ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. मामले को लेकर कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाए हैं.

Paddy Token Farmer Suicide AttemptPaddy Token Farmer Suicide Attempt
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jan 13, 2026,
  • Updated Jan 13, 2026, 3:42 PM IST

छत्तीसगढ़ में एमएसपी पर सरकारी धान खरीदी की प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अब ताजा मामला कोरबा जिले से सामने आया है, जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जरूरी टोकन नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने आत्महत्या की कोशिश करने की कोशिश की, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. कोरबा जिले के हरदीबाजार थाना क्षेत्र के कोरबी गांव में रहने वाले 56 वर्षीय किसान सुमेर सिंह ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया.

किसान को जिला अस्‍पताल किया गया रेफर

हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल कोरबा रेफर किया गया. फिलहाल उनका इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है. पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों के अनुसार, सुमेर सिंह बीते एक महीने से ज्यादा समय से अपने धान को सरकारी खरीद केंद्र में बेचने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन, टोकन जनरेट न होने के कारण उनकी फसल की खरीद नहीं हो पा रही थी.

आरोप- अफसराें ने नहीं की सुनवाई

उनकी पत्नी मुकुंद बाई ने बताया कि कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं निकला. इसी मानसिक तनाव में आकर उन्होंने रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात कीटनाशक का सेवन कर लिया. स्थानीय ग्रामीण संजय श्रीवास ने बताया कि सुमेर सिंह के पास करीब 3.75 एकड़ कृषि जमीन है और उन्होंने लगभग 68 क्विंटल धान की उपज की थी, जो अब भी उनके पास पड़ी हुई है.

'जनदर्शन' में भी नहीं सुलझी समस्‍या

समस्या यह भी रही कि सुमेर सिंह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते, जबकि टोकन प्रणाली पूरी तरह डिजिटल है. ऐसे में वे दूसरों पर निर्भर रहे, लेकिन सिस्टम की खामियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं. ग्रामीणों का आरोप है कि किसान ने कई बार राजस्व विभाग और धान खरीद से जुड़े अधिकारियों के चक्कर लगाए. यहां तक कि जनदर्शन जैसे सार्वजनिक शिकायत मंच पर भी आवेदन दिया गया, लेकिन टोकन से जुड़ी तकनीकी दिक्कत दूर नहीं हुई. गांव में चर्चा है कि अगर समय पर धान की बिक्री हो जाती तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती.

कांग्रेस सांसद ने सरकार पर साधा निशाना

घटना की जानकारी मिलने पर कोरबा से कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत भी अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने इसे बेहद दुखद बताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्‍होंने कहा  कि एक आदिवासी बहुल राज्य में आदिवासी किसान का इस तरह टूट जाना व्यवस्था की असफलता को दिखाता है. उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की और कहा कि धान खरीद प्रणाली में मनमानी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.

वहीं, जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है. जांच के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी किसान को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने यह भी कहा कि टोकन प्रणाली से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए प्रक्रिया को और सरल बनाने पर विचार किया जा रहा है. गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है. पिछले महीने महासमुंद जिले में भी एक बुजुर्ग किसान ने टोकन नहीं मिलने से परेशान होकर आत्महत्या की कोशिश की थी. (पीटीआई)

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