Makar Sankranti 2026: पतंगों से पोंगल तक, भारत के अलग-अलग शहरों में अनोखे ढंग से मनता है ये त्योहार

Makar Sankranti 2026: पतंगों से पोंगल तक, भारत के अलग-अलग शहरों में अनोखे ढंग से मनता है ये त्योहार

मकर संक्रांति 2026 पर खास जानकारी. जानें कैसे अहमदाबाद, प्रयागराज, अमृतसर, चेन्नई और जयपुर में पतंग, पोंगल, लोहड़ी और माघी के रंग-बिरंगे उत्सव मनाए जाते हैं. इस त्योहार के जरिए नई फसल, सूर्य पूजा और पारंपरिक खाने की खुशबू का मजा उठाएं. भारत के अलग-अलग शहरों में मकर संक्रांति का अनोखा और रंगीन अंदाज देखें.

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पतंगों से पोंगल तक, भारत के अलग-अलग शहरों में अनोखे ढंग से मनता है ये त्योहारपतंगों, पोंगल और रंगीन उत्सवों का आनंद

मकर संक्रांति भारत का एक बहुत ही खास त्योहार है. यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने और नई फसल के स्वागत करने का तरीका है. हर साल यह 14 जनवरी को मनाया जाता है. इस दिन लोग खुशियां मनाते हैं, दान करते हैं, स्वादिष्ट खाना बनाते हैं और अपने लोगों के साथ समय बिताते हैं. भारत के अलग-अलग शहरों में मकर संक्रांति का अंदाज अलग होता है. आइए जानते हैं कुछ खास शहरों में यह त्योहार कैसे मनाया जाता है.

पतंगों का पर्व

अहमदाबाद में मकर संक्रांति का सबसे खास हिस्सा पतंग उड़ाना है. पूरे शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सज जाता है. अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में देश-विदेश के लोग हिस्सा लेते हैं. लोग कई दिन तक पतंग उड़ाते हैं, पतंग काटने की प्रतियोगिता होती है और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं. यहां मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है.

श्रद्धा और स्नान का पर्व

प्रयागराज में मकर संक्रांति को बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. लोग संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदी) के किनारे स्नान करते हैं. यह स्नान पुण्य और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान करते हैं और गलियों में पतंगें उड़ती रहती हैं. प्रयागराज की मकर संक्रांति बहुत शांत और धार्मिक माहौल में होती है.

लोहड़ी और माघी का त्योहार

अमृतसर में मकर संक्रांति का त्योहार लोहड़ी से शुरू होता है. लोहड़ी की शाम लोग आग के चारों ओर जमा होकर गीत-संगीत और नृत्य करते हैं. यह नई फसल और सर्दियों के अंत का संकेत है. अगले दिन मकर संक्रांति को माघी कहा जाता है. इस दिन लोग स्वर्ण मंदिर के सरोवर में स्नान करते हैं और पारंपरिक व्यंजन खाते हैं. पतंगबाजी और दीप जलाना भी यहाँ की खास परंपरा है.

पोंगल उत्सव

चेन्नई में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है. यह त्योहार किसानों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता दिखाने का अवसर है. पोंगल चार दिन तक चलता है. घरों को सजाया जाता है, सूर्य देव की पूजा होती है और स्वादिष्ट पकवान बनते हैं. लोग अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं. इस दिन पशुओं का सम्मान करना भी खास होता है.

रंग और रौनक का त्योहार

जयपुर में मकर संक्रांति बहुत रंग-बिरंगी और मजेदार होती है. यहाँ की छतों पर सुबह से ही पतंगें उड़ती हैं. जलमहल काइट फेस्टिवल में दूर-दूर से लोग देखने आते हैं. लोग पतंग काटने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं, संगीत और नृत्य होता है. तिल और गुड़ से बने व्यंजन, दीपक जलाना और रात में आतिशबाजी जयपुर की मकर संक्रांति को यादगार बनाते हैं.

मकर संक्रांति का संदेश

मकर संक्रांति हमें नई शुरुआत, खुशियां और परंपराओं का सम्मान सिखाती है. यह त्योहार न सिर्फ खुशी का अवसर है, बल्कि दान, पूजा और मिल-जुलकर रहने की सीख भी देता है. भारत के अलग-अलग शहरों में इसे अलग अंदाज में मनाना हमें देश की विविधता और संस्कृति की सुंदरता दिखाता है.

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