1 करोड़ की सब्सिडी पर सियासी संग्राम! क्या है बागवानी स्कीम जिस पर घिरे भागीरथ चौधरी?

1 करोड़ की सब्सिडी पर सियासी संग्राम! क्या है बागवानी स्कीम जिस पर घिरे भागीरथ चौधरी?

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर बागवानी विभाग की पॉलीहाउस सब्सिडी योजना के तहत लाभ लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने 2018 में नियमानुसार आवेदन किया था और पूरी जांच-प्रक्रिया के बाद 2025 में सब्सिडी प्राप्त हुई. सरकार की इस योजना के तहत किसानों को पॉलीहाउस लगाने पर 50 से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जिससे आधुनिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है.

Bhagirath ChoudharyBhagirath Choudhary
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jun 29, 2026,
  • Updated Jun 29, 2026, 1:44 PM IST

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर उनके ही विभाग से करीब 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी लेने के आरोपों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर उन पर हमलावर है. अब इन आरोपों पर खुद केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने खुलकर अपनी बात रखी है और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है.

'आज तक' से खास बातचीत में भागीरथ चौधरी ने कहा कि वह बचपन से ही खेती से जुड़े हुए हैं और किसान वर्ग से आते हैं. उन्होंने कहा खेती हमारा पैतृक रोजगार है. डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में उनकी जमीन है. वहां पानी की भारी किल्लत है और भूमिगत जल लगभग समाप्त हो चुका है. ऐसे में वहां बारिश के पानी को जमा करने के लिए 2 करोड़ लीटर क्षमता का एक फार्म पॉन्ड और पॉलीहाउस बनवाया है.

इस विवाद के बीच आइए जानते हैं कि पॉलीहाउस की वह योजना क्या है जिसमें भागीरथ चौधरी ने खीरे की खेती के लिए सब्सिडी ली है. 

राजस्थान सरकार आधुनिक बागवानी खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस लगाने पर अच्छी-खासी आर्थिक सब्सिडी (4,000 वर्ग मीटर तक) देती है. पात्र किसान सरकारी लागत नियमों (आमतौर पर 850-935 रुपये प्रति वर्ग मीटर) के आधार पर 50% से 70% तक सब्सिडी पा सकते हैंच

सब्सिडी का ढांचा

सब्सिडी की राशि किसान की जमीन की श्रेणी और समुदाय की स्थिति के आधार पर अलग-अलग होती है.
सामान्य श्रेणी के किसान: इकाई लागत पर 50% सब्सिडी.
छोटे/मझोले किसान और SC/ST श्रेणी: 70% तक सब्सिडी.

पात्रता की शर्तें

राजस्थान का स्थायी निवासी और सक्रिय किसान होना चाहिए.
सिंचाई के पर्याप्त और वेरिफाइड स्रोत वाली कृषि योग्य जमीन होनी चाहिए.
सब्सिडी अनुदान के लिए अधिकतम क्षेत्र 4,000 वर्ग मीटर है.

जरूरी दस्तावेज

आवेदन करने से पहले ये दस्तावेज तैयार रखें-

जमाबंदी की कॉपी (6 महीने से ज्यादा पुरानी न हो)
आधार कार्ड/जन आधार कार्ड
मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट
विभाग की ओर से मंजूर/रजिस्टर्ड फर्म से कोटेशन
सिंचाई के स्रोत का प्रमाण और जाति/श्रेणी प्रमाण पत्र (छोटे, सीमांत, SC/ST किसानों के लिए)

आवेदन की प्रक्रिया

आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किए जा सकते हैं.
ऑनलाइन: आवेदन करने के लिए आधिकारिक राजकिसान पोर्टल या राजस्थान SSO पोर्टल पर जाएं.
ऑफलाइन: अपना आवेदन जमा करने के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाएं.

राजस्थान बागवानी विभाग से प्रशासनिक मंजूरी और आधिकारिक वर्क ऑर्डर मिलने से पहले पॉलीहाउस का निर्माण शुरू न करें. निर्माण पूरा होने और विभागीय समिति द्वारा सफलतापूर्वक वेरिफिकेशन के बाद सब्सिडी आमतौर पर किश्तों में किसान के खाते में भेजी जाती है.

कृषि राज्य मंत्री का जवाब

सब्सिडी के सवाल पर स्पष्टीकरण देते हुए कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि यह लाभ उन्हें किसी विशेष रियायत के तहत नहीं, बल्कि सरकारी नियमों के अनुसार मिला है. उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस की कुल लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है, जो देश के हजारों किसानों को मिलता है. उन्होंने इसके लिए साल 2018 में ही आवेदन किया था और साल 2025 में पॉलीहाउस लगने व फसल खड़ी होने के 6 महीने बाद, बाकायदा फोटोग्राफी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने पर यह सब्सिडी जारी हुई है.

चौधरी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा विपक्ष के पास मेरे खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है. मेरे राजनीतिक जीवन में आज तक कोई 1 रुपया का भी आरोप नहीं लगा सका. मैंने अपने खेत पर बाकायदा एक बड़ा बोर्ड लगा रखा है, जिसमें लोन और सब्सिडी की पूरी जानकारी लिखी है. अगर मेरे मन में कोई खोट होती या कुछ गलत होता, तो मैं वहां बोर्ड क्यों लगाता?

मंत्री ने कहा कि वह अन्य किसानों को भी अपने खेत पर बुलाते हैं ताकि वे आधुनिक और उन्नत तकनीक से खेती करना सीखें. उन्होंने बताया कि इस पॉलीहाउस में फिलहाल खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें उगाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि बिना सब्सिडी के पॉलीहाउस लगाना किसी भी आम किसान के लिए घाटे का सौदा है, इसलिए सरकार यह सहायता देती है ताकि किसान आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकें.

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