
केंद्र सरकार मछली पालन क्षेत्र को आधुनिक और संगठित बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) लागू कर रही है. वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चलने वाली इस योजना पर करीब 6000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका मकसद मछली पालकों, मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है.
मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में जानकारी दी कि योजना के तहत 11 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) लॉन्च किया गया. इसके जरिए मछली क्षेत्र से जुड़े लोगों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होगी.
योजना के तहत मछली पालकों को मत्स्य बीमा खरीदने पर प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) दी जा रही है. सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को बीमा प्रीमियम का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलेगा.
इसके तहत अधिकतम सहायता 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और 4 हेक्टेयर जल क्षेत्र तक प्रति किसान 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है. वहीं केज कल्चर, आरएएस, बायोफ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक मत्स्य प्रणालियों के लिए भी प्रति किसान अधिकतम 1 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है.
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को सामान्य वर्ग की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मछली पालकों और छोटे उद्यमियों को संस्थागत वित्त तक पहुंच बढ़ाना है. इससे बिजनेस करने की पूंजी और अन्य जरूरतों के लिए बैंक लोन लेना आसान होगा. सरकार का मानना है कि इससे मछली बिजनेस की लागत कम होगी और कारोबार का विस्तार हो सकेगा.
पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है. बाजार तक पहुंच बढ़ाने, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और व्यवसाय विकास योजनाओं के जरिए उनकी क्षमता बढ़ाई जाएगी.
सरकार इस योजना के जरिए पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु-स्मार्ट मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रही है. इसमें पानी और ऊर्जा की बचत, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, बेहतर स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण, रोग प्रबंधन और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा.
योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को प्रदर्शन आधारित अनुदान भी दिया जाएगा. सामान्य वर्ग के उद्यमियों को कुल निवेश का 25 प्रतिशत या अधिकतम 35 लाख रुपये तक सहायता मिलेगी.
वहीं एससी, एसटी और महिला मालिकाने वाले उद्यमों को कुल निवेश का 35 प्रतिशत या अधिकतम 45 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा. स्वयं सहायता समूहों, महिला संगठनों और सहकारी समितियों के लिए यह सहायता 2 करोड़ रुपये तक हो सकती है.
सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए देशभर में 1.70 लाख रोजगार तैयार करना है. रोजगार उपलब्ध कराने वाले पात्र उद्यमों को पुरुष कर्मचारियों के लिए 10,000 रुपये और महिला कर्मचारियों के लिए 15,000 रुपये प्रति वर्ष तक सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है.
योजना के तहत क्वालिटी, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और खाद्य सुरक्षा मानकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की दुनिया में मांग बढ़ाने और निर्यात को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
सरकार के अनुसार, यह योजना मांग आधारित है और आंध्र प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है. हालांकि इसके लिए किसी जिले या राज्य के लिए अलग-अलग रोजगार लक्ष्य तय नहीं किए गए हैं.